इन मूर्तियों मे मूर्तकार दुबारा रंग भरके नया बना सकता है—

इन मूर्तियों मे मूर्तकार दुबारा रंग भरके नया बना सकता है—
आजकल गणेश उत्सव चल रहा है,इंसान एक सप्ताह पूजने के बाद विसर्जन कर आता है,कहीं भी किसी भी जलमे जहां गंदगी बेसुमार होती है, जिस मूर्ति की आपने पूजा की एक सप्ताह उस मूर्ति के टुकड़े टुकड़े होते हम जब देखते है तो बहुत पीणा होती है सोचकर कि ये कैसी अंधभक्ति है,जो सात दिनतक चलने के बाद आदमी से भी ज्यादा बुरा हस्र हम अपनी आँखों से देखते है,इन देव मूर्तियों की, यह कैसी देव पूजा है जो आदमी करता और फिर गंदगी मे फेंककर मूर्ति के टुकड़े टुकड़े होते देखने को मिलते है इस अंधभक्ति से ज्यादा तो हम एक बड़ा सहयोग करके उस मूर्तिकार की सहायता कर सकते है पूजन के बाद यह मूर्तियां वापस करके इन्हीं मूर्तियों को आने बाले दुवारा के पर्व के लिये आसान लागात से रंग भरके नये आकार मे आपको देसकता है मूर्तकार जिससे हम मूर्तियों की दुर्दशा भी बचा सकते है और श्रद्धा भी और मूर्तिकार की सहायता करके गणेश उत्सव को श्रद्धामय बना सकते है,लेकिन आजका यह गणेश उत्सव अंत मे श्रद्धा कोही चोटिल कर रहा यहअसहनीय दर्द महसूस कराता है तब सरकार,और कानून को गणेश विसर्जन पर टोटली रोक लगानी चाहये नाकि दुबारा यह सब करने पर डंडसहिता जैसे—- इंसान ईश्वर बना हुआ है देवताओं का और हम भारतवासी इस कल्चर को सदियों से निभाते चले जा रहे है,ये कैसी अंधभक्ति है जो इंसान ईश्वर का ईश्वर बन रहा है इस तरह के कृत्यों से रोकने के बजाय हम पीछे लगजाते है, देवताओं को कांधा देने जैसी भीड़ मे तमाशाबीनो की तरह क्यों किसी की आत्मा चोटिल नहीं हुई इस अंधी भक्ति से, फिर चाहे कानून, सरकार, और समाज।
लेखिका,पत्रकार, दीप्ति चौहान

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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