अवैध क्लिनिक व अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान

अवैध क्लिनिक व अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान

गली-मोहल्लों में फल-फूल रहे अवैध क्लिनिक अस्पतालों की अनदेखी क्यों सीएमओ साहब?
एटा। तीन दिन पूर्व हरियाणा पीएनडीटी नोडल टीम द्वारा शिकोहाबाद रोड़ मोहल्ला भगीपुर- सुनहरी नगर तिराहे पर संचालित एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापामार कार्यवाही में एक संचालिका सहित तीन लोगों को भ्रुण लिंग परीक्षण के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
अब आते हैं असली मुद्दे पर ‌आखिर हरियाणा टीम को‌ एटा तक क्यों ‌आना पड़ा जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सो रहे थे या फिर महीनादारी समय से मिल रही थी बता दें लंबे समय से जनपद में अवैध क्लिनिक, अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग मेहरबान रहा है प्रत्येक गली-मोहल्ले में अवैध क्लिनिक अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं लेकिन स्वास्थ्य विभाग को‌ यह सब दिखाई नहीं देते क्योंकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के आंखों पर पट्टी बंधी हुई है। होली मोहल्ले में संचालित एक क्लिनिक संचालिका का दबदबा इस कदर हावी है कि कई बार कार्यवाही होने ‌के बाद में क्लिनिक धड़ल्ले से चलता रहा है और आगे भी इसी तरह चलता रहेगा क्योंकि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्ट अधिकारियों के रहते ऐसे लोगों को डरने की जरूरत नहीं समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा अवैध क्लिनिक अस्पतालों पर छापामार कार्यवाही चलती रहती है लेकिन स्थिति ज्यों के त्यों रहती है, क्योंकि अधिकारियों को ‌जो चाहिए उसे समय पर पहुंचाते रहो और गरीबों ‌की जान-माल के साथ खिलवाड़ करने ‌का लाइसेंस पाते रहो।
एक भ्रुण लिंग संचालिका की गिरफ्तारी के बाद भी स्वास्थ्य विभाग जिले में फैले अवैध क्लिनिक अस्पतालों पर छापामार अभियान करने की बजाय चुपचाप स्थिति संभलने का इंतजार कर रहा है मामला ठंडा पड़ते ही जियो और जीने दो वाली (स्कीम) लागू रहेगी जैसा पहले से होता आ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम हमेशा रहीं संदेह के घेरे में……
स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम छापामार कार्यवाही के नाम पर खानापूर्ति करके जमकर अवैध उगाई करती है यही कारण हैं अवैध क्लिनिक अस्पतालों के संचालक बेफिक्र होकर धड़ल्ले से जनता के जान-माल से खिलवाड़ करते हैं जिस तरह अवैध क्लिनिक अस्पतालों की भरमार है उसे देखकर अंदाजा लगा सकते हैं बिना संरक्षण के संचालक क्लिनिक अस्पताल खोलकर नहीं बैठे हैं, स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम पर हमेशा सवाल उठते रहे हैं आखिर कार्यवाही के बाद भी दोबारा क्लिनिक अस्पताल धड़ल्ले कैसे चलते रहते हैं इसका मतलब साफ है जांच टीम को चढ़ाव चढ़ता रहेगा तब-तक कार्यवाही डस्टबिन में पड़े कूड़ेदान से ज्यादा ‌कुछ नहीं, ऐसे में एक बात साफ है यह आदान-प्रदान वाली व्यवस्था ‌चलती रहेगी और जनता के जान-माल से खिलवाड़ अवैध झोलाछाप डॉक्टर करते रहेंगे, निवर्तमान जिलाधिकारी डॉ विभा चहल ने जिस तरह इन अवैध क्लिनिक अस्पतालों पर शिकंजा ‌कसा वो फिर से बेलगाम हो चुके हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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