भाजपा एक नहीं 10 मंत्री भी बना दे, बिना आरक्षण नहीं मिलेगा निषादों का वोट-लौटनराम

जब तक एससी आरक्षण का राजपत्र व शासनादेश नहीं,भाजपा से गठबंधन नहीं

भाजपा एक नहीं 10 मंत्री भी बना दे, बिना आरक्षण नहीं मिलेगा निषादों का वोट-लौटनराम
लखनऊ,31 अगस्त।राष्ट्रीय विमुक्त जनजाति दिवस के अवसर पर विकासशील इंसान पार्टी ने मझवार,तुरैहा, गोंड़ जाति को परिभाषित करने व मछुआरों का परम्परागत पेश बहाल करने की मांग से सम्बंधित मांगपत्र जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राज्यपाल व प्रदेश के मुख्यमंत्री को सम्बोधित दिया।वर्तमान सरकार यूपी, बिहार, झारखण्ड के मल्लाह,केवट, बिन्द, बेलदार, नोनिया,गोड़िया,चाईं, तियर को अनुसूचित जाति का दर्जा व परम्परागत पुश्तैनी पेशेवर निषाद/मछुआ समुदाय के बालू मौरंग खनन,मत्स्य पालन पट्टा का अधिकार वापस कर दे तो भाजपा से गठबंधन निश्चित है।उन्होंने कहा की भाजपा एक नहीं 10 मंत्री,एमएलसी बना दे,आरक्षण राजपत्र व शासनादेश, अधिकार बहाली के बिना निषाद समाज भाजपा को वोट नहीं देगा।
वीआईपी प्रदेश अध्यक्ष चौधरी लौटनराम निषाद ने प्रतिनिधि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति में शामिल मझवार, गोंड, तुरैहा जाति को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए राजपत्र व शासनादेश जारी करने के साथ मछुआरा समाज के परम्परागत पेशों की बहाली का निर्णय लेती है,तो मिशन-2022 में पौराणिक राम की नैया पार लगवाने वाले निषादराज के वंशज भाजपा की नैया पार लगाएंगे।अभी नहीं तो कभी नहीं कि बात करते हुए कहा कि राज्य व केन्द्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी भाजपा सरकार ने निषाद जातियों को एससी का आरक्षण व परम्परागत पेशा बहाली का शासनादेश व राजपत्र जारी नहीं किया तो फिर वादे पर विश्वास नहीं।उन्होंने मल्लाह, मांझी, केवट, राजगौंड, बिन्द आदि को मझवार तथा गोडिया, धुरिया, कहार, धीमर, धीवर, रायकवार, राजगोंड आदि को गोंड नाम से जाति प्रमाण पत्र जारी करने, मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा देने व मछुआरों के परम्परागत पेशों की बहाली की केंद्र व उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है।कहा कि सेंसस-1961 के अनुसार मांझी, मल्लाह केवट, राजगौड़ आदि मझवार की पर्यायवाची जातियां हैं, लेकिन शासन प्रशासन के द्वारा इन जातियों को मझवार का प्रमाण पत्र नहीं दिया जा रहा है।बताया कि जाटवी, दोहरा, दोहरे, नीम, पिपैल, कर्दम, रैदासी, दबकर, मोची, कुरील, शिवदशिया, रमदशिया,उत्तरहा, दखिनहा,अहिरवार,जैसवार,शंखवार,कबीरपंथी, भगत,चमकाता, धुसिया,झुसिया आदि को जाटव या चमार के नाम से निर्बाध रूप से प्रमाण पत्र दिया जाता है तो मल्लाह,माझी, केवट, बिन्द आदि को मझवार के नाम से क्यों नहीं ? जब कि सेंसस-1961 के अनुसार उक्त जातियां मझवार की पर्यायवाची जातियां हैं।
निषाद ने कहा कि मछुआरों के परम्परागत पेशों पर सामन्ती माफियाओं का कब्जा होने से पुश्तैनी पेशेवर जातियां अपने परम्परागत अधिकारों से वंचित हो रही हैं। उन्होने प्रदेश सरकार से 1994-95 का बालू, मौरंग खनन व मत्स्य पालन पट्टा से संबंधित शासनादेश बहाल करने की मांग किया है। समय समय उत्तर प्रदेश, बिहार व मध्यप्रदेश की सरकारों ने कई बार केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति का आरक्षण देने की सिफारिश की।लेकिन केन्द्र सरकार ने अभी तक निर्णय नहीं लिया।
निषाद ने साफ तौर पर कहा-प्रदेश सरकार ने प्रस्ताव भेजकर केन्द्र सरकार से 17 अतिपिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिला दिया या अनुसूचित जाति में शामिल मझवार,तुरैहा,गोंड़ को परिभाषित कराकर निषाद/मछुआ समुदाय की जातियों को अनुसूचित जाति का लाभ दिला दिया तो भाजपा से गठबंधन निश्चित है।कहा कि देश की राजधानी दिल्ली का मल्लाह(धीवर,धीमर,केवट,कश्यप,कहार,झीमर),पश्चिम बंगाल का मल्लाह,केवट,कैवर्ता, जलकेउट, केवटा, बिन्द, तियर,चाईं, जलिया,झालो मालो, महिष्यदास व उड़ीसा का केवटा,कैवर्त,धीवर,तीयर, जलकेउट, मांझी अनुसूचित जाति में तो उत्तर प्रदेश, बिहार,झारखण्ड का मल्लाह,केवट, बिन्द, धीवर, कहार,चाईं, तियर क्यों नहीं?
धरना में वीआईपी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सन्तोष साहनी,प्रदेश महासचिव अनुराग यादव,युवा मोर्चा के प्रदेश महासचिव जेपी निषाद, ज़ीशान अहमद,महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष मंजू कश्यप,प्रवक्ता सौरभ निषाद,गयाप्रसाद धुरिया, रामकुमार कश्यप, जिलाध्यक्ष मनोज वर्मा,रामबाबू गौड़, रमेश निषाद,सचिन माइकल डेन,नीलम सोनी आदि सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल रहे। *चौ.लौटनराम निषाद*

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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