केरल उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश मांगने के कारण नौकरी से हटाई गई महिला को बहाल करने का आदेश दिया

Legal Update


‘मातृत्व और करियर में संतुलन बनाना कितना मुश्किल, सिर्फ एक महिला ही जानती है’: केरल उच्च न्यायालय ने मातृत्व अवकाश मांगने के कारण नौकरी से हटाई गई महिला को बहाल करने का आदेश दिया

÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷

???? मातृत्व अवकाश से वंचित किए जाने के मामले में दायर एक याचिका पर विचार करते हुए केरल हाईकोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग में परामर्शदाता के रूप में कार्यरत एक म‌‌हिला की सेवा को समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले पर असहमति प्रकट की, और बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया।

????जस्टिस देवन रामचंद्रन ने अपने फैसला में कहा कि “केवल एक महिला ही जानती है कि मातृत्व और अपने करियर को संतुलित करना कितना कठिन है।”

???? वंदना श्रीमेधा ने उक्त याचिका दायर की थी। वह अनुबंध पर एक परामर्शदाता के रूप में कार्यरत थी। उन्हें कथित तौर पर अनधिकृत अनुपस्थिति के लिए सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था।

????अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया था कि मातृत्व अवकाश के उनके अनुरोध को ठुकरा दिया गया था, और उसकी पीड़ा तब और बढ़ गई, जब उसने छुट्टी लेने के लिए आवेदन किया तो उसकी सेवा समाप्त कर दी गई।

????️श्रीमेधा ने कहा कि उन्होंने मातृत्व अवकाश के लिए एक प्रतिनिधित्व के साथ कई अधिकारियों से संपर्क किया था, हालांकि उनके सभी प्रयास व्यर्थ गए। मामले में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता बी मोहनलाल ने किया।

????न्यायालय के समक्ष यह भी प्रस्तुत किया गया था कि विभाग के निदेशक ने याचिकाकर्ता को “उचित सावधानी के बिना” नियुक्त करने के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने की धमकी दी थी, इस प्रकार उनका आशय यह था कि कि उसे रोजगार की पेशकश नहीं करनी चाहिए थी, केवल इसलिए कि उन्होंने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया था और उन्हें उसे अपने बच्चे की देखभाल के लिए छुट्टी की आवश्यकता थी।

???? कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा, “किसी भी विस्तार की आवश्यकता के बिना, यह रवैया ऐसा नहीं है, जिसे यह अदालत इस सदी में स्वीकार कर सकती है, जबकि महिलाएं कई भूमिकाएं निभा रही हैं, विभिन्न जिम्मेदारियों को निभा रही हैं, और अपनी वैध महत्वाकांक्षाओं को पाने के लिए, जीवित रहने और उड़ान भरने के लिए कुशल मल्टीटास्करों के रूप में खुद को ढाल रही हैं।”

⏺️सिंगल बेंच ने पूरी घटना को दुर्भाग्यपूर्ण पाया और जोर देकर कहा कि इस तरह के कृत्य याचिकाकर्ता जैसे लोगों के आत्मविश्वास और मनोबल को कमजोर करते हैं, जो हर दिन जीवन की चुनौतियों का बहादुरी से सामना करती हैं, व्यक्तिगत और आधिकारिक जीवन को संतुलित करने के ल‌िए दृढ़ संकल्प हैं।

⭕ सरकारी वकील सुनील कुमार कुरियाकोस ने बेंच के ध्यान में यह भी लाया कि याचिकाकर्ता को अभी तक प्रतिस्थापित नहीं किया गया था और उसका पद अभी भी खाली पड़ा हुआ था। हालांकि प्रतिवादी उसे बहाल करने के लिए सहमत हो गए, लेकिन वे इस बात पर कायम रहे कि याचिकाकर्ता को उस अवधि के लिए कोई मौद्रिक लाभ नहीं दिया जाएगा, जब वह छुट्टी पर थी।

????बेंच ने यह फैसला अधिकारियों के विवेक पर छोड़ा है। रिट याचिका को स्वीकार करते हुए, प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता को तुरंत बहाल करने और छुट्टी के लिए उसके आवेदन पर जल्द से जल्द पुनर्विचार करने का आदेश दिया। न्यायालय ने याचिकाकर्ता की सेवा समाप्त करने के आदेश को रद्द करते हुए कहा, “एक नई मां के रूप में जीवन एक रोलर-कोस्टर पर होने जैसा है और एक कामकाजी मां होना कठिन है।

???? मातृत्व की सूक्ष्मता पर कभी भी ठीक से विचार नहीं किया जा सकता है और इसमें असंख्य दैनिक मुद्दों के माध्यम से आवाजाही शामिल है, जो अंततः बच्चे के स्वास्थ्य और भविष्य को निर्धारित करता है।

▶️बच्चे के साथ मां की निरंतर निकटता वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह से आवश्यक साबित हुई है और यह, मुख्य रूप से और अन्य बातों के साथ, यही कारण है कि मातृत्व अवकाश के प्रावधान अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किए जाते हैं।”

केस टाइटिल: वंदना श्रीमेधा जे बनाम केरल राज्य और अन्य।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks