ताजमहल के मुख्य गुंबद की होगी सफ़ाई

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के आगरा मुख्यालय के अनुसार ताजमहल के मुख्य गुंबद की सफ़ाई का कार्य वर्षा ऋतु उपरांत शुरु किया जायेगा।
पुरातत्वविद ताजमहल की विशेष सफ़ाई मुग़ल काल में होने वाली मड पैक तकनीक द्वारा करते हैं जिसमें मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग किया जाता है।
पुरातत्व विभाग के अनुसार यह मौसम मड पैक पद्धति के लिए उचित नहीं है इसलिए अक्तूबर से कार्य प्रारंभ किया जा सकता है जिसमें छः माह का समय लग सकता है और लगभग 50 लाख रुपये लागत आने का अनुमान है।
ताजमहल की सफ़ाई होना आवश्यक है परंतु एक प्रश्न पर्यटन से जुड़े लोगों को परेशान कर रहा है कि क्या यह उचित समय होगा?
जैसा कि सर्वविदित है कोरोना महामारी के कारण अत्याधिक प्रभावित क्षेत्र पर्यटन ही है। मार्च 2020 से ही पर्यटनकर्मी बिना एक पैसे की आमदनी के बेरोज़गार घर बैठे हुए हैं।
अब जबकि पर्यटन संबंधी संसदीय समिति अगस्त के बाद अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के पुनर्संचालन की सिफ़ारिश कर रही है व अपनी भारत सरकार भी 5 लाख मुफ़्त वीज़ा पहले आओ पहले पाओ के आधार पर देने की घोषणा कर चुकी है तो ऐसे में पर्यटन क्षेत्र में आशा की एक किरण जाग रही है।
पर्यटन व्यवसायी अपेक्षा कर रहे थे कि आने वाले पर्यटन सीज़न से कुछ राहत मिल ही जायेगी मगर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की इस ख़बर ने उनकी अपेक्षित ख़ुशी पर वज्रपात कर दिया है।
एप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसियेशन आगरा के अध्यक्ष शमसुद्दीन ख़ान के अनुसार यदि पुरातत्व विभाग अक्तूबर से कार्य प्रारंभ करेगा और 6 माह तक कार्य चलेगा का अर्थ है कि आगामी पर्यटन सीज़न सफ़ाई की भेंट चढ़ जाएगा। इसका सीधा अर्थ है कि तीन साल की बेरोज़गारी। आपको बता दें कि उत्तर भारत की जलवायु परिस्थिति में पर्यटन सीज़न अक्तूबर से मार्च तक ही होता है।
पर्यटन गिल्ड आगरा के राजीव सक्सेना के अनुसार ताजमहल महामारी के चलते दो बार बंद रहा था तब यह कार्य किया जा सकता था। यदि महामारी के दौरान मज़दूरों के संक्रमित होने की आशंका थी तो महामारी का प्रकोप अभी भी ख़त्म नहीं हुआ है। राजीव सक्सेना के अनुसार इस कार्य को मार्च के बाद भी किया जा सकता है।
अलिश्बा हॉलीडेज़ की महाप्रबंधक तत़हीर चौहान का कहना है कि जब ताजमहल का पूरा मुख्य गुंबद ही ढक दिया जाएगा तो फिर कौन पैसे और समय दोनों बर्बाद करके ताजमहल देखने आना चाहेगा। विदेशी तो छोड़िये घरेलू पर्यटक भी नहीं आएंगे।