गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए जनपद स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन –

गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए जनपद स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन –

एटा

जिले में गर्भवती महिलाओं को कोरोना से बचाव के लिए टीके लग सकेंगे। गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग तैयारियां कर रहा है। केंद्र ने पहले ही गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए गाइडलाइन जारी कर दी है व गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने की मंजूरी भी मिल गई है। शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में होटल देव रेजिडेंसी में गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के लिए ब्लॉक स्तरीय चिकित्सा अधिकारी, अधीक्षको,सीडीपीओ आदि को प्रशिक्षण दिया गया। जिससे गर्भवती महिलाओं के टीका लगने में कोई दिक्कत नहीं आए।

प्रशिक्षण के दौरान जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ राम सिंह ने बताया कि जिले में गर्भवती महिलाओं को कोरोना का टीका लगाकर प्रतिरक्षित करना बहुत आवश्यक है। क्योंकि गर्भवती महिलाओं में कोविड-19 संक्रमण होने पर एक नहीं बल्कि दो जान खतरे में आ जाती है। उन्होंने बताया स्वास्थ्य मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन लगवाने संबंधी नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑफ इम्यूनाइजेशन (NTAGI) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। डीआईओ द्वारा मेडिकल ऑफिसर्स, सीडीपीओ आदि को टीका लगने से पूर्व गर्भवती महिलाओं की काउंसलिंग के विषय में बताया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि टीका लगने के बाद भी आने वाले कुछ महीनों तक गर्भवती महिला का सुपरविजन किया जाएगा, जिससे गर्भवती महिला व उसके बच्चे का स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सके। साथ ही टीका लगने की जानकारी गर्भवती महिला के एमसीएच कार्ड पर दर्ज करना अनिवार्य होगा।

डब्ल्यूएचओ से एसएमओ डॉ रंजीता रानी ने बताया कि कोरोना का टीका गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। गर्भवती महिलाओं द्वारा गर्भावस्था के किसी भी समय टीका लगवाया जा सकता है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने गर्भवती महिलाओं और हाल ही में बच्चों को जन्म दे चुकीं महिलाओं पर ज्यादा असर डाला। गंभीर लक्षण वाले केस और मृत्यु दर भी पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर में ज्यादा रहे। दूसरी लहर में लक्षण वाले केस का आंकड़ा बढ़कर 28.7 फीसदी तक हो गया था, जबकि पहली लहर में ये आंकड़ा 14.2 फीसदी तक था। वहीं दूसरी लहर में मृत्यु दर 5.7 फीसदी तक बढ़ गई जोकि पहली लहर में सिर्फ 0.7 फीसदी तक थी। इसलिए कोरोना की संभावित तीसरी लहर से बचाव के लिए गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण आवश्यक है। हालांकि देखा गया है कि कोरोना संक्रमण की 95 प्रतिशत महिलाएं एक्यूट व माइनर सिम्टम्स वाली होती हैं। परंतु 5% महिलाओं में सीवियर व सीरियस संक्रमण हो सकता है। जोकि प्री- टर्म बर्थ , सी सेक्शन सर्जरी व मां अथवा बच्चे की मृत्यु का कारण तक बन सकता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण किया जाना अति आवश्यक है।
उन्होंने बताया यदि किसी गर्भवती महिला को संक्रमण हो चुका है तो संक्रमण से ठीक होने के 3 माह बाद ही टीका लगाया जाना चाहिए।

कार्यशाला के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश कुमार त्रिपाठी, डीआईओ डॉ राम सिंह,डीएसओ डॉ सुधीर मोहन,डिप्टी सीएमओ अभिनव दुबे, आईएमए प्रेसिडेंट डॉ स्वतंत्र शर्मा, आईएमए सेक्रेटरी डॉ आशुतोष गुप्ता, एसएमओ डॉ रंजीता रानी,वीसीसीएम प्रवीन त्रिवेदी,डीएमसी आलोक वर्मा, समस्त चिकित्सा अधिकारी व चिकित्सा अधीक्षक, सीडीपीओ आदि मौजूद रहे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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