बारिश ना होती तो तुम खाओगे क्या…

प्रकृति एक माँ है जिसे पहले से पता हैं कि धरती को कब और क्या चाहिए.जैसे-जैसे मौसम बदलता है धरती की जरूरतो को आसमान मे बैठा वह शक्स समझ भी जाता है और पूर्ती भी करता है.
आज हम बात कर रहे हैं कल रात से हो रही बारिश की जिसे पाना तो हर कोई चाहता है लेकिन घर पडोसी का भीगे यह आम जनमानस के जेहन मे अक्सर धारणा बनी होती हैं.
जनपद एटा मे रात से हो रही बारिश की जहा किसानो के लिये अम्रत है वही नगर पालिका क्षेत्र मे रहने वालो के लिये मुसीबत भी यह बारिश साबित हो रही है.परंतु जनपद मे जल भराव की समस्या यूहि नही बनी है इसके पीछे के कई कारण है जिन्हे भोगोलिक द्रष्टि से नकारा भी नहीं जा सकता है और नजर अन्दाज करना भी गुनाहगार होगा,पूरा एटा नगर पालिका क्षेत्र एक गहरे गड्ढे मे बसा हुआ है जिसका संतुलन कभी बन ही नहीं सकता है जब तक वर्तमान मे बन रही सीवर लाईन का प्रारम्भ ना हो जाये.
दूसरा जलभराव के पीछे नगर पालिका द्वारा सही दिशा मे पानी की निकासी भी निश्चित नही की है,जहा भी जैसे भी मन आया पैसे बटोरे और नालियों के निर्माण कर दिये गये है|
सरकार चाहे वर्तमान हो या पूर्व की सरकार रही हो.नगर पालिका परिषद् को सभी ने सिर्फ़ लूट का अड्डा सावित किया है!जिसमे सरकारो के प्रतिनिधि हो या फ़िर सभासद सभी का हिस्सा रहा है.
एटा शहर एक द्रोपदी है जिसका समय -समय पर चीरहरण किया गया है बस कुछ बदला है तो वो चेहरे बदल गये वाकी नियत वही रही हैं!
ध्रतराष्ट्र की तरह कल भी प्रशासन की आंखों पर कुछ लोगो ने पट्टी बाध रखी थी और आज भी यही है.
बरसात एक वरदान है इसलिये इस वरदान को अपनाये और उस ईश्वर का धन्यवाद दे.क्यूकि दुनिया के उन मरुस्थलो पर जब एक नजर पडती,जहा एक बून्द भी जमी की तरफ़ आती है या आसमान मे काले-काले बादल ही निहारने को मिल जाते हैं तब खुद को महसुस होता है कि निश्चित ही हम धरा के उन चुनिंदा स्थानो पर है जिसे स्वर्ग कहे तो अतिश्योक्ति नहीं होगा….
कई मुद्दे है कहने के लिये.अभी इस उत्सव का आंनद लीजिये.धरा के कई जीव इस प्यास के लिये प्यासे थे!
चिड़िया का घर भी भीग गया था.
डुब गया उस सर्प दंश का घर भी.
किसी की आह दुनिया मे सुनाई नही दी.
दो बुन्दे क्या गिरी इन्सानो की विरासते हिल ग़ई.