
जांच के आदेश पर उड़ी पालिका प्रशासन की नींद
एटा। नगर पालिका में मनमाने ढंग से निर्माण कार्य कराए जाते रहे हैं। सभासदों की शिकायत पर जांच में चार ऐसे कार्य सामने आ गए, जहां निर्माण की जरूरत ही नहीं थी। इसे लेकर प्रशासन ने 77 और कार्यों की जांच शुरू करा दी है। इसके चलते पालिका के अधिकारियों, कर्मचारियों की नींद उड़ गई है।
नगर पालिका को 2020-21 में 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत शहर में 87 कार्य कराने के लिए प्रशासन से मंजूरी मिली। इनमें से अधिकांश काम हो गए और कुछ कराए जाने हैं। इस बीच पालिका के कुछ सभासदों ने 10 कार्यों की शिकायत डीएम अंकित अग्रवाल को सौंपी। आरोप लगाया गया कि इन स्थानों पर पहले से ही कार्य कराए जा चुके हैं, वहां पालिका टेंडर डालकर दोबारा पैसा निकालना चाहती है। जांच कराई गई तो अधिकारियों की रिपोर्ट में चार निर्माण कार्यों में इस तरह की गड़बड़ी मिली। डीएम ने इन सभी कार्यों को निरस्त कर दिया। वहीं अन्य 77 कार्यों की जांच चार डिप्टी कलक्टर को सौंपी है।
जांच के घेरे में अफसर-ठेकेदार
बनी हुई सड़क, नाली, पुलिया आदि के टेंडर दोबारा कराए जाने पर कई अफसर जांच के घेरे में आ गए हैं। अवर अभियंता से लेकर ईओ ने बिना स्थलीय जांच किए टेंडर कैसे जारी किए? वहीं ठेकेदारों को बिना कार्य भुगतान क्यों किया जा रहा था? इन सवालों के जवाब भी जांच में आना शेष हैं।
कुछ सभासदों ने अपने वार्डों से संबंधित 10 कार्यों की शिकायत की थी। जांच के समय अधिकारियों ने नौ शिकायतों को सही माना, लेकिन अंतिम रिपोर्ट में चार गलत बताए हैं। निष्पक्ष जांच हुई तो अन्य वार्डों के कार्यों में भी तमाम गड़बड़ी मिलेंगी। – दिलीप पचौरी सभासद, शिकायतकर्ता
मौके पर जाकर सभी दस कार्यों की जांच की गई। इनमें से चार कार्य ऐसे पाए गए, जिन्हें कराने की जरूरत नहीं थी। इससे सरकारी धन की बर्बादी हुई है। अन्य सभी 77 कार्यों की भी जांच शुरू करा दी गई, तीन-चार दिन में रिपोर्ट आ जाएगी। – विवेक कुमार मिश्र, एडीएम प्रशासन