नगरपालिका ने ही नक्शा पास किया और उसी ने अवैध निर्माण बता कर ढहा दीं दुकानें

नगरपालिका ने ही नक्शा पास किया और उसी ने अवैध निर्माण बता कर ढहा दीं दुकानें
भ्रष्टाचारियों के रहते गंदगी से एटा बना नर्क, नगरवासियों का सुख चैन से जीना हुआ हराम

दुकान स्वामी ने कहा, ईओ नगरपालिका एटा ने नक्शा पास कराने के 20 हजार, और निर्माण कराने के 5 लाख रूपये लिए हैं। मेरे पास नक्शा और जगह के वैध कागज हैं फिर भी नगरपालिका अवैध निर्माण बताकर मेरी दुकानों को गिरवा रही है।

एटा। विगत कई वर्षों से कार्यालय नगरपालिका एटा में कमीशन और रिश्वत का खेल सरेआम चल रहा है जिसे जिला प्रशासन आंख बंदकर देखने में मस्त है। नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी हों या चेयरमैन अथवा कर्मचारीगण रिश्वत लेते समय यह नहीं देखते कि उन्हें जो रिश्वत मिल रही है वह किसी नाजायज काम की तो नहीं मिल रही। मिली रिश्वत को वे आंख बंदकर बंटवारा कर अपनी-अपनी जेबों में ठूंस लेते हैं। चाहे वह रिश्वत उनके गले की फांस ही क्यों न बन जाये, लेकिन उन्हें क्या अपनी बात से पलट जाने में देर नहीं लगती।
विगत दिवस एक ऐसा ही मामला नगरपालिका के द्वारा ली गई रिश्वत का सामने आया है जिसमें दुकान मालिक मनोज यादव निवासी रेलवे रोड एटा चिल्ला-चिल्लाकर कह रहा है कि उनके मकान का नक्शा पास कराने की एबज में ईओ नगरपालिका एटा दीप वार्ष्णेय ने 20 हजार रूपये और निर्माण कराने के लिए 5 लाख रूपये लिए हैं। उसके बाद मैंने मकान बनाया है। जिसे शिकायतकर्ता रवीश गोला द्वारा पूर्व जिलाधिकारी डॉ0 विभा चहल को अवैध निर्माण किये जाने की शिकायत पर हुई जांच के बाद ढहाया जा रहा है।
उल्लेखनीय है नगरपालिका एटा के अनुसार पालिका की भूमि पर अवैध कब्जा कर बनाई गई भूमि को नाप कर एसडीएम अबुल कलाम के निर्देशन में आयी टीम तहसीलदार, नायब तहसीलदार की मौजूदगी में लेखपाल द्वारा नाप तौलकर नगरपालिका की जेसीबी से ही दुकानों को ढहा दिया गया है।
दुकान ढहाये जाने के समय ही मनोज यादव पत्रकारों से अपनी दास्तां बयां कर रहा था कि किस प्रकार से नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी ने रिश्वत लेकर नक्शा पास कराकर निर्माण करा दिया। मनोज यादव ने यह भी कहा कि वह अदालत का दरवाजा खटखटायेगा। क्योंकि उसकी जिंदगी भर की कमाई और बैंक से लोन लेकर यह जगह बनवाई थी। यदि मनोज यादव अदालत गया तो नगरपालिका द्वारा पास किया गया नक्शा अधिशासी अधिकारी दीप वार्ष्णेय व अन्य कर्मचारियों के गले का फंदा बन सकता है।
आपको अवगत करा दें कि चेयरमैनी के इस कार्यकाल में 4 वित्तीय वर्ष बीत रही हैं लेकिन कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हो सका है और जबसे अधिशासी अधिकारी के रूप में दीप वार्ष्णेय ने चार्ज संभाला है एटा नगर पूरा का पूरा नर्क बन गया है ऐसी नगर में चर्चा है। नगरपालिका में भ्रष्टाचार का यह आलम है कि 14 सभासदों ने पूर्व में हो चुके कार्यों को घोटाले करने हेतु नये एजेंडे में शामिल कर लिया गया जिसकी शिकायत जिलाधिकारी अंकित अग्रवाल से की गई और उस पर जांच टीम बना दी गई है। जिलाधिकारी अंकित अग्रवाल की प्रथम प्रेस वार्ता में ही जनपद मुख्यालय के समस्त प्रेस प्रतिनिधियों ने एक स्वर से नगर का निरीक्षण किये जाने हेतु जिलाधिकारी महोदय से अनुरोध किया था, जिस पर उन्होंने शीघ्र ही निरीक्षण किये जाने का आश्वासन दिया था। शहर के मुख्य मार्ग और समस्त गलियां नर्क समान हैं जिससे एटा नगरवासियों का सुख चैन से जीना हराम हो गया है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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