
जिले में 11 केंद्रों पर मनाया गया खुशहाल परिवार दिवस
=परिवार नियोजन को लेकर अनूठी पहल, अब हर महीने मनेगा खुशहाल परिवार दिवस
एटा,
शासन के निर्देश पर प्रत्येक महीने की 21 तारीख को खुशहाल परिवार दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया गया है। इसी को लेकर सोमवार को जनपद में जिला महिला अस्पताल व सभी ब्लॉक के प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर खुशहाल परिवार दिवस मनाया गया । इस दिवस का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना और परिवार नियोजन सेवाओं की महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि समुदाय में परिवार नियोजन सम्बन्धी जागरूकता तथा स्वीकार्यता बढ़ाना एवं परिवार नियोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार करना खुशहाल परिवार दिवस का मुख्य उद्देश है। इसके साथ ही जनपद एवं ब्लाक स्तर पर परिवार नियोजन के स्थाई व अस्थाई साधनों को इच्छुक लाभार्थीयों, दम्पत्ति तक पहुंचना खुशहाल परिवार दिवस का एक उद्देश्य है । दिवस के आयोजन के समय लक्षित लोगों को परिवार नियोजन के साधनों के विषय में जागरूक किया गया। उन्होंने बताया कि आगे के दिवसों के लिए आशा कार्यकर्ता गृह भ्रमण के दौरान लक्षित समूह के उन दम्पति को चिह्नित करेंगी जो परिवार नियोजन के किसी साधन को नहीं अपना रहे हैं । साथ ही उनकी काउंसिलिंग से लेकर बास्केट ऑफ़ च्वाइस में मौजूद साधनों से अवगत कराएंगी ।
परिवार नियोजन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुधीर कुमार ने बताया जिले में परिवार नियोजन को अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के उद्देश से सरकार द्वारा निर्देश दिया गया है कि जनपद की सभी स्वास्थ चिकित्सा इकाइयों पर हर माह की 21 तारीख को खुशहाल परिवार दिवस मनाया जाए। इसी के अंतर्गत सोमवार 21 जून जनपद के 11 स्वास्थ्य केंद्रों पर खुशहाल परिवार दिवस मनाया गया । साथ ही एसीएमओ ने महिलाओं से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा परिवार नियोजन साधनों को अपनाएं और दो बच्चों के बीच कम से कम 3 वर्ष का अंतराल रखें।
लॉजिस्टिक्स मैनेजर परिवार नियोजन अवनीश पाठक ने कहा- कि खुशहाल परिवार दिवस पर परिवार नियोजन के साधनों को अपनाने पर जोर दिया गया है । महिला और पुरुष नसबंदी के साथ ही कंडोम, कॉपर-टी, अंतरा व माला-एन जैसे परिवार नियोजन के साधनों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि खुशहाल परिवार दिवस पर तीन विशेष समूह को परिवार नियोजन के प्रति प्रोत्साहित करने का लक्ष्य दिया गया है। पहले समूह में हाई रिस्क प्रेगनेंसी (एचआरपी) वाली महिलाएं और दूसरे समूह में 1 जनवरी 2020 के बाद विवाहित दंपत्ति व तीसरे समूह में ऐसे योग्य दंपत्ति को शामिल किया गया है जिनके तीन या तीन से अधिक बच्चे हैं।