गृह विभाग उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे है अग्नि शमन विभाग व नर्सिंग होम व हाँस्पिटल

गृह विभाग उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ा रहे है अग्नि शमन विभाग व नर्सिंग होम व हाँस्पिटल
गाजियाबाद 20 जून( ) उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव राजीव कुमार द्वारा पुलिस अनुभाग- 8 लखनऊ पत्र दिनांक 27 जुलाई 17 के माध्यम से समस्त अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेन्टर में हुयी अग्नि दुघर्टना की समीक्षा में भवन में समुचित अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का अभाव गया था । इस घटना से अग्नि शमन विभाग व नर्सिंग होम व हाँस्पिटल के संचालक सबक नहीं लिया है और न ही ले रहे हैं । समय- समय पर अग्नि शमन विभाग द्वारा भवन का निरीक्षण कर अग्नि शमन व्यवस्था में सुधार हेतु जो टिप्पणियाँ दी जाती है उन पर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है । जिसके परिणामस्वरूप अप्रिय घटना के समय जान- माल की क्षति होने की संभावना बनी रहती है । न मालूम क्यों अग्नि शमन विभाग के अधिकारी गण क्यों नहीं देते हैं, यह भी एक विचारणीय प्रश्न है ?
नर्सिंग होमों व हाँस्पिटल में अग्नि शमन उपकरण भवन में स्थापित किये गये है ।उनके संचालन हेतु न तो कोई प्रशिक्षित है और न ही तद् विषय नोडल अधिकारी ही बनाया गया है ।
जबकि भवन निर्माण से पूर्व उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा से मानचित्र का परीक्षण करा कर अनापत्ति प्रमाण- पत्र व अनुमोदन आवश्यक है के नियमों का पालन नहीं किया जाता है । भवन पूर्ण हो जाने के पश्चात उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा के माध्यम से निरीक्षण करा कर कम्पलीशन सर्टिफिकेट प्राप्त अनावार्य होता है जिसका पालन नहीं किया जाता है ।
समय- समय पर मानचित्र के अनमोदन तथा कम्पलीशन सर्टिफिकेट के अनुसार समस्त अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं जैसे पलायन मार्ग, कम्पार्ट में टेंशन स्मोक मैनेजमेंट तथा भवन में स्थापित अग्नि शमन सुरक्षा व्यवस्था जैसे फायर डिटेक्शन, फायर हाईड्रेन्ट, फायर एक्सटिम्यूशर इत्यादि के नवीनीकरण की व्यवस्था की व्यवस्था सुनिश्चित कराया जाना, भूकंप या आपात कालीन स्थिति में यंत्रों व उपकरणों का संचालन एवं प्रयोग कैसे जाये की व्यवस्था होनी चाहिये ।
नर्सिंग होम व हाँस्पिटलों में अग्नि शमन विभाग के नियमों का पालन नहीं किया जाता है ।
जनहित में नर्सिंग होम व हाँस्पिटलों में अग्नि शमन विभाग के नियमों का सख्ति से पालन कराया जाये जिससे आपात कालीन स्थिति में जान- माल की क्षति से बचा जा सके । साथ ही जब तक नर्सिंग होम व हाँस्पिटलों के मानक पूर्ण न हो जाए जब तक मुख्य चिकित्सा अधिकारी अपने विभाग में इनका नवीनीकरण न किया जाये ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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