
मुरादाबाद : रमजान उल मुबारक में अलविदा के जुमे की नमाज घरो में ही अदा की गयी । लॉकडाउन के कारण शाही जामा मस्जिद के इमाम और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने रोजेदारों से घरों में रहकर ही नमाज अदा करने की अपील की थी ।
बतादेकि रमजान के महीने को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले 10 दिन रहमत और बरकत के होते हैं तो अगले 10 दिन मगफिरत की इबादत होती है। आखिरी 10 दिनों में जहन्नुम की आग से छुटकारे की दुआ की जाती है। इस दौरान शब-ए-कद्र भी आती है। काफी रोजेदार एतकाफ (एकांतवास) की इबादत में बैठे हैं। वह ईद-उल-फितर के चांद का दीदार करने के बाद ही एतकाफ से उठेंगे।
शाही जामा मस्जिद के इमाम मौलाना ने कहा कि अलविदा का जुमा इसलिए खास होता है कि इस मुबारक महीने का ये आखिरी जुमा होता है, इसके बाद ही रोजेदारों को खुशियां देने के लिए ईद-उल-फितर का त्योहार आता है। मौलाना ने मुस्लिम भाई से जुमा अलविदा की नमाज को घर पर ही अदा करने की अपील की थी ।
जिससे सभी मुसलमानो ने जुमा अलविदा की नमाज़ अपने घरों पर ही अदा की | और लॉकडाउन का पालन किया |
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए मस्जिदों में नहीं पढ़ी जा रही हैं। वहीं शुक्रवार को मस्जिदें भी खाली रही। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने रोजेदारों से घरों में रहकर ही नमाज अदा करने की अपील की थी । जिसके बाद लोगो ने अपने-अपने घरो में शुक्रवार को जुमा अलविदा की नमाज अदा की।
पिलकपुर श्योराम जामा मस्जिद के पेश इमाम ने गुरूवार को मुस्लिम भाईयो से अपील की थी की जुमा अलविदा की नमाज सब अपने-अपने घरों पर अदा करें। उन्होंने कहा की कोरोना वायरस को देखते हुए जो कदम शासन-प्रशासन ने उठाए हैं उस पर हम सभी को साथ देना चाहिए ।
पिलकपुर श्योराम समाज सेवी नासिर हुसैन अन्सारी ने अपने संदेश में कहा कि लॉकडाउन उल्लंघन करने से लोग बचें,जरूरी काम होने पर ही घर से निकले। आज प्रशासन ने जो कदम उठाए हैं, वो हमारी बेहतरी के लिए हैं। इस वायरस से सबसे बेहतर लड़ाई का तरीका यह है कि हम सामाजिक दूरी बनाए रखें और अपने-अपने घरों में ही रहें।