
Agra. अंधा बांटे रेवड़ी अपने-अपनेन कूं दे, जी हां कुछ इसी तर्ज पर बाबा शाह बहादुर दरगाह की संपत्ति को वक्फ माफिया घेरने में लगे हैं। वक्फ बोर्ड से बनकर आई कमेटी हाजी भोलू के हाथों में खेल रही है। कमेटी सदस्यों की बात करें, तो वह इस कदर गैर जिम्मेदार हैं, कि उनको दरगाह संपत्ति के बारे में क, ख, ग की जानकारी नहीं है। संपत्ति में किरायेदार कौन-कौन है, बोर्ड में कितना रुपया जमा कराया है, रसीद कितनी की दी जा रही है? इन सब बातों से उनका कोई मतलब नहीं हैं। आपके अखबार दैनिक अग्र भारत द्वारा पूछे जाने पर कमेटी मुतवल्ली ऐसे बात करते हैं, जैसे मानों वह अपनी मां के पेट से अभी पैदा हुए हों, हालांकि उनकी बातें सुनने पर ऐसा प्रतीत होता है कि कमेटी में महज वह एक प्यादे के रूप में रख दिये हैं। इन सबके पीछे सरगना कोई और है! कमेटी सचिव हर बात का जबाव देने के लिए अपने अध्यक्ष एजाज कुरैशी का नाम लेते हैं और मिस्टर कुरैशी से बात हुई, तो हाजी भोलू और उनकी बातों में बहुत अंतर है। दोनों की बात सुनकर समझ नहीं आ रहा है कि कमेटी को चला कौन रहा है। बतादें कि एजाज, हाजी भोलू के रिश्तेदार हैं। सूत्रों की बात करें तो कमेटी सदस्य महज सफेद हाथी हैं। पूरी संपत्ति को अपने कब्जे में करने के लिए कमेटी की आड़ में हाजी भोलू ने संतरज बिछाई हुई है।