कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन हेतु लिए वजन सप्ताह की हुई शुरुआत

शासन से प्राप्त निर्देश के क्रम में जनपद में कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन हेतु लिए वजन सप्ताह की हुई शुरुआत

सही समय पर पोषण युक्त आहार व देखरेख करके काफी हद तक बच्चों को कुपोषण से मिलेगी राहत

एटा। जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल के निर्देशन में जनपद में कुपोषित बच्चों के चिन्हांकन हेतु 17 जून गुरुवार से वजन सप्ताह की शुरुआत की गई। इस दौरान जनपद के प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र पर शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन किया गया, साथ ही परिवारजनों को कुपोषण के प्रति जागरूक किया गया। गुरुवार को प्राथमिक विद्यालय चोंचा वनगांव प्राथमिक विद्यालय पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ बाल विकास परियोजना अधिकारी सत्य प्रकाश पांडे द्वारा किया गया। उन्होंने अभिभावकों को बच्चों की उम्र के अनुसार वजन व ऊंचाई के महत्व के विषय में जानकारी देते हुए बच्चों को पोषण आहार देने के विषय में अभिभावकों को जानकारी दी।

सीडीपीओ एसपी पाण्डेय ने बताया कि जनपद में 17 जून से 24 जून तक वजन सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। जिसका उद्देश्य कुपोषित बच्चों की पहचान करना है।उन्होंने बताया कि उम्र के हिसाब से बच्चों में वजन और लंबाई की नाप द्वारा कुपोषण की पहचान की जा सकती है। बच्चों में बौनापन भी कुपोषण की पहचान होती है। उम्र के हिसाब से लंबाई नहीं बढ़ने से बौनापन होता है। यह ध्यान में रखते हुए वजन दिवस पर बच्चों के वजन के साथ साथ उनकी लंबाई भी नापी जाती है।

उन्होंने कहा कि बच्चों को सही समय पर पोषण युक्त आहार व देखरेख करके काफी हद तक कुपोषण से बचा जा सकता है। बच्चों में वजन कम या ज्यादा होने पर उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां हो सकती है। सही वजन बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ कई बीमारियों से उन्हें दूररखता है। उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी अच्छी होती है।

टीएसयू प्रदीप कुमार ने बताया कि बच्चे के जन्म के पश्चात 6 माह तक मां का दूध ही पूर्ण आहार होता है।जन्म के छह माह पूर्ण होने पर प्रत्येक बच्चे के सही पोषण के लिए मां के दूध के अलावा पूरक आहार की भी जरूरत होती है। इस अवधि में शिशु को डायरिया और निमोनिया का खतरा अधिक होता है। ऐसे में संतुलित पूरक आहार बच्चों के लिए आवश्यक होता है। जिससे बच्चा सुपोषित होता है व उसकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है।

इस अवसर पर अरुणा, रेखा, प्रियंका, आंगनबाड़ी कार्यकत्री अनिता, बबली, सहायिका गायत्री, अभिभावक आदि मौजूद रहे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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