
यूपी (गोरखपुर) : बीआरडी में नहीं मिला स्ट्रेचर, बीमार बेटी को गोद में लेकर पिता ने तय की 400 मीटर की दूरी
बीआरडी मेडिकल कालेज में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों की मुसीबत कम नहीं हो रही है। ट्रॉमा सेंटर पर स्ट्रेचर व व्हीलचेयर नदारद हैं। इस वजह से तीमारदार अपने मरीजों को गोद में लेकर ढोने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत गंभीर मरीजों को हो रही है। ट्रामा सेंटर से 400 मीटर दूर होने के कारण मेडिसिन वार्ड तक मरीजों को ले जाने में तीमारदारों का दम फूल जा रहा है। ट्रॉमा पहुंचे करीब 50 फीसदी मरीज मेडिसिन वार्ड ही भेजे जाते हैं।
ऐसा ही वाकया सामने आया जब बिहार के गोपालगंज निवासी हसमुद्दीन अपनी बेटी तमन्ना (18) को इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। तमन्ना को झटका आ रहा था। उसकी सांस फूल रही थी। वह बार-बार अचेत हो जाती। उसे देखते ही ट्रॉमा सेंटर में तैनात ईएमओ ने उसे मेडिसिन विभाग के इमरजेंसी में ले जाने की सलाह दी। यह इमरजेंसी वार्ड 14 में संचालित होती है। परिजन काफी देर तक स्ट्रेचर के लिए भटकते रहे। जब स्ट्रेचर नहीं मिला तो परिजन कंधे पर लादकर ले जाने लगे।
बीमार बेटी का वजन मजबूर पिता के कंधों को झुका दे रहा था। किसी तरह से वह 400 मीटर दूरी तय कर मेडिसिन विभाग तक पहुंचे। हद तो तब हुई जब लिफ्ट भी बंद मिली। ऐसे में परिजन मरीज को पैदल ही रैम्प के जरिए ले गए। बीच रास्ते में कई जगह परिजन हांफ जा रहे थे। जैसे तैसे करीब 10 मिनट में वह मेडिसिन वार्ड पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने युवती का इलाज शुरू किया।
बीआरडी के अधिकारियों ने बताया कि मरीजों की सहूलियत के लिए ट्रॉमा सेंटर पर 26 स्ट्रेचर रखे गए हैं। इनमें से छह मरम्मत के लिए गए हैं। मौजूदा समय में 20 स्ट्रेचर दुरुस्त हैं। ट्रॉमा पर दो व्हील चेयर भी रखे गए हैं। वह भी परिजनों को नहीं मिलते हैं।
डॉ. राजेश राय, एसआईसी, नेहरू अस्पताल का कहना है कि मरीज को स्ट्रेचर नहीं मिला तो यह गम्भीर मामला है। ऐसा नहीं होना चाहिए। कर्मचारियों द्धारा लापरवाही की जा रही है। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि मरीज को किसी भी तरह की कोई परेशानी न हो। स्ट्रेचर की जरूरत है तो उसे पूरा किया जाएगा।