लॉकडाउन में तार-तार हुई इन परिवारों की जिंदगी, जो दूसरों को देते थे रोजगार, अब सब्जी-टॉफी बेचने को मजबूर

यूपी : लॉकडाउन में तार-तार हुई इन परिवारों की जिंदगी, जो दूसरों को देते थे रोजगार, अब सब्जी-टॉफी बेचने को मजबूर

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बीस हजार से अधिक बुनकर समाज के परिवारों के जीवन के तानाबाना को कोरोना महामारी ने बिखेर दिया है। हालात यह हैं कि कभी 50 लोगों को रोजगार देने वाले लोग सब्जी-टॉफी बेचकर गुजारा कर रहे हैं। बुनकरों के मोहल्लों में सुनाई देने वाली लूम की खट-खट की आवाज करीब डेढ़ साल से शांत है। डराने वाली खामोशी के बीच बुनकर परिवार जीवन जीने की जद्दोजहद में लगे हैं। जिला प्रशासन साढ़े चार सौ हथकरघा होने की बात तो स्वीकारता है, लेकिन इन लोगों के हालात का आकलन आज तक नहीं किया गया है।

रसूलपुर निवासी लूम संचालक हाजी उबैदुल्लाह नदवी बताते हैं कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन के कारण लूम क्या बंद हुए बुनकर समाज के अधिकतर परिवारों के जीवन में अंधेरा छा गया। अधिकतर दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले बुनकरों की जमापूंजी परिवार का पेट पालने में खत्म हो चुकी है। किसी तरह दिन गुजार रहे बुनकर परिवार सब्जी, बिस्कुट और टॉफी बेचकर या ठेला खींच कर गुजारा करने को मजबूर हैं।

हाजी उबैदुल्लाह के मुताबिक शहर के रसूलपुर, गोरखनाथ, पुराना गोरखपुर, नौरंगाबाद, जाहिदाबाद, जमुनहिया बाग, रुद्दलपुर मोहनलाल पुर, बख्तियार आदि मोहल्लों बुनकर समाज के लोग रहते हैं। कोरोना महामारी से पहले इन मोहल्लों में सुनाई देने वाली लूम की खट खट करीब एक साल से खामोश है। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो करीब बीस हजार कामगार, मजदूर, बुनकरों की रोजी-रोटी छिन गई। इनमें से अधिकतर दिहाड़ी पर काम करने वाले बुनकर हैं, जो परिवार चलाने के लिए छोटे-मोटे काम कर रहे हैं। हाजी उबैदुल्लाह खुद भी ट्यूशन पढ़ा कर परिवार का गुजारा कर रहे हैं।

लॉकडाउन के कारण बंदी की मार झेल रहे दस से अधिक लूम के मालिक रिजवानुल्लाह कहते हैं कि लॉकडाउन में कच्चा माल मिलना तो दुश्वार हुआ ही है उससे बड़ी मुश्किल उत्पाद की मांग खत्म होने की है। मालिक अपना उत्पाद ऑलद इंडिया हैंडलूम को आपूर्ति करते थे। लॉकडाउन में हैंडलूम बंद हैं इसलिए महीनों से मांग नहीं है। बताते हैं कि उनके कारखानों में दो सौ से अधिक बुनकर रोजगार पाते थे। लॉकडाउन में काम बंद हुआ तो अधिकतर ने सब्जी, किराना आदि बेचना शुरू कर दिया। कुछ पुराने कर्मचारियों को वह अभी तक गुजारे लायक भत्ता देते आए हैं, लेकिन अब पूंजी खत्म हो रही है। उन्हें चिंता है कि लॉकडाउन खुलने के बाद कच्चे माल के लिए उन्हें बाजार से पूंजी उठानी पड़ेगी।

उपनिदेशक हथकरघा उद्योग के राम बड़ाई ने बताया कि गोरखपुर में लगभग साढ़े चार सौ हथकरघा हैं। इनसे जुड़े बुनकर और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति खराब है। लॉकडाउन के दौरान कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। दूसरे इनके तैयार माल का विपणन नहीं हो पा रहा है। लॉकडाउन में इस उद्योग को कितना नुकसान हुआ इसका आकलन नहीं किया गया है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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