ब्लैक फंगस क्या हैं ? उससे कैसे बचा जाए? पढ़ें, बचाव के तरीके

ब्लैक फंगस क्या हैं ? उससे कैसे बचा जाए? पढ़ें, बचाव के तरीके

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में एक और चिंता बढ़ाने वाली बात सामने आ रही है । कोरोना की वजह से लोग म्यूकोर माइकोसिस की चपेट में आ जा रहे हैं । गुजरात और दिल्ली में कई मामले सामने आए हैं जहां कोरोना से रिकवरी के बाद लोग म्यूकोर माइकोसिस जैसी खतरनाक बीमारी का शिकार हो रहे हैं।ब्लैक फंगस यानि म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन से हो जाए सावधान । यह ब्लैक फंगस क्या हैं ? उससे कैसे बचा जाए? बचाव के तरीके क्या हैं ? पढे़ और उस पर अमल करें ।

1) लोग मास्क को कई दिन तक धोते नहीं है उल्टा सैनिटाइजर से साफ करके काम चलाते है । ऐसा न करें । कपड़े के मास्क बाहर से आने पर तुरंत मास्क साबुन से धोएं, धूप में सुखाएं और प्रेस करें। सर्जिकल मास्क एक दिन से ज्यादा इस्तेमाल न करें।
N95 मास्क को महंगा होने की वजह से लंबे समय तक उपयोग करना पड़े तो साबुन के पानी में प्रतिदिन कई बार डुबोकर धो लें, रगड़े नहीं । बेहतर हो कि नया इस्तेमाल करें ।

2 ) अधिकांश सब्जियां खासकर प्याज़ छीलते समय दिखने वाली काली फंगस हाथों से होकर आंखों या मुंह मे चली जाती है । बचाव करें । साफ पानी, फिटकरी के पानी या सिरके से धोएं फिर इस्तेमाल करें ।

3 ) फ्रिज के दरवाजों और अंदर काली फंगस जमा हो जाती है । खासकर रबर पर तो उसे तत्काल ब्रश साबुन से साफ करें । और बाद में साबुन से हाथ भी धो लें ।

4 ) जब तक बहुत आवश्यक न हो,ऑक्सीजन लेवल सामान्य है तो अन्य दवाओं के साथ स्टेरॉयड न लें ।जब तक आपका डॉक्टर सलाह नहीं दे। विशेष तौर पर यह शुगर वाले मरीजों के लिए अधिक खतरनाक है ।

5 ) डॉक्टर की सलाह पर ही ऑक्सिजन लगायें। अपने आप अपनी मर्ज़ी से नहीं । यदि मरीज को ऑक्सीजन लगी है तो नया मास्क और वह भी रोज साफ करके इस्तेमाल करें । साथ ही ऑक्सीजन सिलिंडर में स्टेराइल वाटर/saline डालें और रोज बदलें ।

6 ) बारिश के मौसम में मरीज को या घर पर ठीक होकर आ जाएं तब भी किसी भी नम जगह बिस्तर या नम कमरे में नहीं रहना है । अस्पताल की तरह रोज बिस्तर की चादर और तकिए के कवर बदलना है । और बाथरूम को नियमित साफ रखना है ।पजावित्री आदि भी नीम की अग्नि में डाले। नीम उबाल कर पानी से आंख धो लें। बच्चों का ध्यान रखे, बाहर ना घूमने दें, मास्क सेनिटाइजर और हाथ धोने की प्रक्रिया पर लापहरवाही ना हो। बच्चों को कैल्शियम की गोली जरूर दे।

म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन:

सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ ईएनटी सर्जन डॉक्टर मनीष मुंजाल ने बताया था कि, ‘हम Covid-19 की वजह से होने वाले खतरनाक फंगल इंफेक्शन के कई मामले देख रहे हैं । पिछले दो दिनों में म्यूकोर माइकोसिस 6 मामले सामने आए हैं । पिछले साल भी इससे कई लोगों की मौत हुई थी, कई लोगों की आंखों की रौशनी चली गई थी और कुछ लोगों के नाक और जबड़े की हड्डियां निकालनी पड़ी थीं ।’

म्यूकोरमाइकोसिस की बीमारी इतनी गंभीर है कि इसमें व्यक्ति को सीधे ICU की जरूरत पड़ जाती है । कोरोना से ठीक हुआ व्यक्ति अगर इस बीमारी की चपेट में आता है तो समय पर इलाज न होने से उसकी जान भी जा सकती है । पिछले साल कोरोना की पहली लहर में भी कई लोग इस बीमारी से संक्रमित हुए थे । इससे कुछ लोगों की जान चली गई तो वहीं कुछ लोगों को इससे आंखों की रौशनी गंवानी पड़ गई. आइए जानते हैं कि म्यूकोरमाइकोसिस क्या है और किन लोगों को इससे ज्यादा खतरा है ।

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस ? ध्यान से पढ़ें :

क्या है म्यूकोरमाइकोसिस ? म्यूकोरमाइकोसिस एक तरह का फंगल इंफेक्शन है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलता है । इसे ब्लैक फंगस भी कहा जाता है । म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन दिमाग, फेफड़े या फिर स्किन पर भी हो सकता है । इस बीमारी में कई के आंखों की रौशनी चली जाती है । वहीं कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी गल जाती है । अगर समय रहते इसे कंट्रोल न किया गया तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है ।

म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण :

म्यूकोरमाइकोसिस के लक्षण: ब्रेन म्यूकोरमाइकोसिस में चेहरे पर एक तरफ सूजन, सिर दर्द, साइनस की दिक्कत, नाक के ऊपरी हिस्से पर काले घाव जो जल्दी गंभीर हो जाते हैं और तेज बुखार होता है । फेफड़ों में म्यूकोरमाइकोसिस होने पर खांसी, सीने में दर्द और सांस लेने में दिक्कत होती है । वहीं स्किन पर ये इंफेक्शन होने से फुंसी या छाले पड़ सकते हैं और इंफेक्शन वाली जगह काली पड़ सकती है । कुछ मरीजों को आंखों में दर्द, धुंधला दिखाई देना, पेट दर्द, उल्टी या मिचली भी महसूस होती है ।

कोरोना के मरीजों को ज्यादा खतरा:

म्यूकोरमाइकोसिस बीमारी आम तौर पर उन लोगों को तेजी से अपना शिकार बनाती है जिन लोगों में इम्यूनिटी बहुत कम होती है । कोरोना के दौरान या फिर ठीक हो चुके मरीजों का इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है इसलिए वो आसानी से इसकी चपेट में आ जा रहे हैं। खासतौर से कोरोना के जिन मरीजों को डायबिटीज है,शुगर लेवल बढ़ जाने पर उनमें म्यूकोरमाइकोसिस खतरनाक रूप ले सकता है ।

म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन:

सर गंगाराम अस्पताल के ईएनटी विभाग के चेयरमैन डॉक्टर अजय स्वरूप का कहना है कि Covid-19 के इलाज में जरूरत से ज्यादा स्टेरॉयड का इस्तेमाल से भी ये मामले बढ़ रहे हैं । वहीं कोरोना के जिन मरीजों को डायबिटीज की दिक्कत है उनमें ब्लैक फंगस के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं ।
डॉक्टर स्वरूप का कहना है म्यूकोरमाइकोसिस इंफेक्शन के ज्यादातर मामले उन मरीजों में देखे जा रहे हैं । जो Covid-19 से ठीक हो चुके हैं लेकिन उनमें डायबिटीज, किडनी, हार्ट फेल्योर या फिर कैंसर की बीमारी है ।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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