
एटा प्रशासन भी कमाल करता है सहाब….
जिस ओर देखते है तो कुछ ना कुछ सोशल मीडिया पर नुस्खे देखने को मिल ही जायेगे कि कोरोना इस फ़ला दवा से फ़ुर्र हो जाता है या इस मन्त्र से गायब हो जाता है,लेकिन इसी बीच एसा भी देखने को मिल गया कि एक देश और एक कानून ना मिले…खेर इससे भी बडा दुर्भाग्य क्या होगा कि जब एटा जनपद की अलीगन्ज तहसील मे कोरोना गाईडलाइन को तोडने पर बडी कार्यवाहियो की जा रही हो और सेहरा भी तहसील स्तर के अधिकारियो के सिर बाधा गया
हो,तब वही तहसील सदर पर आज अजब-गजब देखने को मिला कि उच्चाधिकारियो की छाती पर एक-दो या दस नही सैकड़ों लोगो ने ताली और थाली पीट-पीट कर प्रशासन और शासन को यह भी बताया की कानून उनके पैरो तले रहता है और पुरे शानोशोकत के साथ विरोध किया गया,लेकिन इससे भी अभागा जिला एटा कि कुछ ही दूरी पर नगर कोतवाली थी तो चार कदम की दूरी पर शहर क्षेत्रअधिकारी का कार्यालय मौजुद है,अगर थोडा और आगे बढ़ जाये तो जिलाधिकारी डा0विभा चहल का ओफ़िस और आवास मौजुद है,परन्तु आज करिश्मा होने का दिन था कि शहर से 52 किलोमीटर दुर अलीगन्ज तहसील पर कोरोना गाईडलाईन तोडने पर बडी-बडी कार्यवाहियो को देखना भी अजब था…
जलेसर तहसील से लेकर अलीगन्ज के अधिकारी अपने पुरे लावलश्कर के साथ सुबह सात बजे से मार्केट मे देखने को मिल जायेगे और लगातार कार्यवाहिया भी कर रहे हैं,जिससे इन तहसीलो मे ताली और थाली नही बज रही है,
रिक्शे वाले क्या करे आप बताये..
अगर बड़े व्यापारी का यह हाल है कि ताली और थाली बजा रहा है तब उस रिक्शे वाले का क्या!!जो रोज कमाता था और खाता था,एसे मे सवाल है कि रिक्शे वाले को क्या बजाना चाहिए… डोल!!!!
योगी सरकार ने जिस तरह से काम किया है
सरकार के कई बड़े अफ़सर हो या फ़िर डाक्टर दिन रात एक करके आज उत्तर प्रदेश को जिस स्तर पर लाये है उसे एटा के व्यापारी अपनी भुख के लिये मटियामेट करने पर तुले हुये है,. व्यापारियो को अभी और सरकार के साथ खडा होना चाहिए और सव्र करना चाहिए क्यूकि सरकार भी नहीं चाहती कि यह दौर देखना पड़े परन्तु कोरोना माहमारी ने जिस तरह से 2019 से दुनिया मे हाहाकार मचाया है.उससे भारत भी अछूता नही रहा है,एसे समय मे व्यापारियो को सयम बरतना चाहिए,जिससे इस मौत के साये से पुरा प्रदेश और देश उभर सके,
क्या यह कानुन नही तोड़ा गया…
जब जिले मे एक 20 किलो गेहूँ चोर को पकड़ा जा सकता है तो क्या इस सदी के सबसे भयानक माहमारी के अपराध को छोड़ना मुनासिब है,इस ताली और थाली के पीछे के दिमाग को पकड़ना बहुत आवश्यक है.
क्या जिलाधिकारी को विफ़ल करने की साजिश है…
दिन-रात एक करके जिस तरह से जिलाधिकारी डाo विभा चहल व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह द्वारा पंचायत चुनावो को बिना गोली और गाली के कराने का इतिहास भी अगर किसी ने बदला है तो जिले के यही दो अधिकारी है,जिन्हे शायद ही कोई भुल सके,एसे मे जिले के व्यापारियो को प्रशासन का सहयोग व साथ देना चाहिए,जिससे इस मौत के तान्डब को रोका जा सके!
तत्कालीन जिलाधिकारी विजय किरण आंनद IAS व महेन्द्र सिंह तवर IAS आज भी जनता के जहन मे और माफ़िआओ के सिर पर घुमते है इससे यह साबित होता है कि तीन महिने के कार्यकाल को तीस साल तक जनता के दिलो पर कैसे अपनी छाप छोड़ी जाती है यह एक छोटी उम्र के दो IAS से सीखा जा सकता है व आज उत्तर प्रदेश सरकार मे सबसे महत्वपूर्ण पदो को शिशोभित कर रहे हैं,सभी अधिकारियों को यह सोचना होगा कि जनता के माफ़िक होना चाहिए या फ़िर माफ़ियाओ के…. क्यू कि CDO अजय प्रकाश जैसे तो महज कुछ चंद पैसो मे बिक सकते हैं जिन्होने जिले के दो अधिकारियो के कार्यो पर पानी फ़ेर दिया,
अब ताली ना बजाये ना थाली..
कोशिश करे कि घर रहे…
सुरक्षित रहे..
भारत के राज्य राजस्थान मे 169 मामले ब्लेक फ़न्गस के आ चुके है…