अमन की बात – दुख और शर्म के साथ कभी हंसी भी आ जाती

– अमन की बात – दुख और शर्म के साथ कभी हंसी भी आ जाती है, इस देश में हम हिन्दू की स्थिति पर, दशकों की नपुंसक सत्ताओं और सदियों की कायर सोच ने आज हमें इस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया है कि हम भारत नाम के इस टुकड़े को भी दिल से अपना नहीं कह सकते विडंबना यह कि हम कुछ सिर्फ हवा में हाथ पैर चलाने और अन्धकूप में चिल्लाने को विवश हैं, बेबस हैं! शायद यही कारण है कि जब कोई चीन इनका दमन करता है या जब कोई इजरायल या फ्रांस आदि इनपर कार्रवाई करता है तो हमारा अंतर्मन प्रफुल्लित होता है और हमें आनंदित करता रहता है हम यह सोच कर ही खुश हो लेते हैं कि चलो, जो हमारा कायर समाज और सरकारें नहीं कर सकती वह ये देश कर रहे हैं यह स्थिति बिल्कुल वैसी ही है कि ‘बेगानी शादी में उल्लू का पठ्ठा दीवाना!’ या जैसे – ‘पड़ोसी के लौंडा हुआ, हिजड़ा अपने आंगन नाचे!’

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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