
पालिका की भूमि पर माफियाओं का चहुंओर अतिक्रमण , आगामी वर्षात में जलमग्न में हो सकता है एटा शहर , पालिका को प्रशासन के सहयोग की दरकार
एटा ( knls ) शहर के हालात आगामी वर्षारितु के आगमन के प्रारम्भ में ही जलमग्न होकर नरक के रूप में तब्दील होने जा रहे हैं ! यह सौ फीसदी सच इसलिए होगा क्योंकि शहर के अन्तर्गत नाले नालियों व पुराने तालाबों के अधिकांश हिस्सों पर भूमाफियायों ने अवैध कब्जा करके उसकी जगह जगह प्लाटिगं कर लोगों के पक्की रिहायशी हवेलियां व मकानात बनवा दिऐ हैं, जिन्हें जिला प्रशासन के सहयोग के बिना हटा पाना नगर पालिका परिषद के बूते में नहीं है ! बताते चलें कि शहर के ठन्डी सडक काली मंदिर के पीछे दो दशक पूर्व एक विशालकाय तालाब हुआ करता था जिसमे समूचे शहर का पानी समा जाता था, इसी प्रकार एक तालाब कैलाश गंज एवं मारहरा दरवाजा पुलिया से पटियाली गेट की पुलिया तक हुआ करता था, जिसको भू-माफियाओ ने अपनी बपौती समझकर लोगों को प्लाटिगं मे तब्दील करके बेच दिया! परिणामस्वरूप आज पालिका परिषद की अकूत सम्पत्तियों पर लोगों ने आवासीय क्षेत्र बनाकर तालाबों के नामोनिशां को ही मिटा डाला है ! यही नहीं शहर में वर्षात के पानी की निकासी के लिए होली मुहल्ला से नेहरू नगर होते हुऐ एक बडा नाला मानपुर की नहर से जुडता था, उस पर भी इन भू-माफियाओ की पैनी नजर पड गई और लोगो ने इस बडे नाले पर भी स्थायी रूप से अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया है ! इस बडे नाले की यदि आज की तारीख में पालिका सफाई कराना चाहे तो नाले के ऊपर जबर्दस्त अवैध अतिक्रमण के चलते मशीन ही नहीं घुस पाऐगी ! इसी तरह बनगांव रोड शांति नगर मुख्य मार्ग से मुहल्ला कटरा तक जाने वाले नाले को भी अतिक्रमणकारियों ने पूर्णरूपेण कवर कर रखा है! कुल मिलाकर यदि नजर दौडायी जावे तो समूचे शहर के हालात आगामी वर्षात के प्रथम चरण में ही इतने बे-दर्द हो जाऐंगे कि चहुंओर हा -हाकार के सिवाय कुछ भी सुनायी नहीं देगा ! नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी डा. दीप कुमार वार्ष्णेय को भी शहर में आने वाली इस भयंकर त्रासदी की सम्पूर्ण जानकारी है लेकिन उनके ठेगें से, क्योंकि उन्हें तो इस शहर में रहना नहीं है, पालिका की लापरवाह कार्यप्रणाली के परिणाम स्वरूप ज्यादा से ज्यादा उनका स्थानान्तरण हो जाऐगा बस यह कोई पनिशमेन्ट तो है नहीं! बहराहल इन दिनों इन गंभीर समस्याओं से नगर के विभिन्न क्षेत्रों में स्वयं अपने निर्देशन में नाले नालियों की सफाई करवा रहे पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश गांधी एवं उनकी धर्मपत्नी पालिकाध्यक्ष श्रीमती मीरा गांधी रूबरू होते हुऐ जिला प्रशासन से अतिक्रमण की चपेट में आऐ इस शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की अपेक्षा की दरकार लगाऐ हुऐ हैं क्योंकि जिलाधिकारी डा विभा चहल की पहल के बिना शहर से अतिक्रमण को हटाया जाना अकेले पालिका परिषद के बस की बात नहीं है ! पालिकाध्यक्ष श्रीमती मीरा गांधी ने जिलाधिकारी डा विभा चहल से अपेक्षा की है कि वह पालिका परिषद को प्रशासनिक सहयोग देकर शहर को आगामी वर्षात में जलमग्न होने से बचाने मे अपने दायित्वों को अवश्य निभाऐंगी !