इस बार ये जोड़ी बहूत याद आई…
एटा को,,,,,,,,,

इस बार ये जोड़ी बहूत याद आई…
एटा
आप लोगों की बहुत याद आई… कोरोना महामारी एक ऐसा समस्या लेकर आई है… जिसके विषय में ज्यादातर लोगों को नहीं मालूम था… महामारी ने पिछले साल जो तांडव मचाया था इस बार उससे भी ज्यादा विकराल रूप देखने को मिल रहा है… इस संकट काल में आमजन की समस्याओं को कम करने के लिए प्रशासनिक व शासन स्तर पर जो कदम उठाए गए वह सराहनीय हैं। जनपद एटा में पिछले वर्ष भी कोरोना था और इस बार भी कोरोना है। पिछली बार भी पुलिस प्रशासन और अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे और इस बार भी है समस्याएं पिछली बार से ज्यादा है, इस पिछले साल भी कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए लॉकडाउन लगाया था… डॉक्टरों की टीम तैयार की गई, स्वास्थ्य सेवाएं सुचारू की गई साथ ही प्रवासी मजदूरों का पलायन और उनको गंतव्य स्थान तक पहुंचने के लिए जो व्यवस्थाएं की गईं उनकी जहां तक सराहना की जाए वह कम है, वहीं दूसरी ओर मजदूरों ने पलायन के दौरान जिन समस्याओं का सामना किया वो किसी से छुपी नहीं है। वो मार्मिक यादें आज भी उन मजदूरों के ज़हन में जिंदा है। जनपद एटा में आज भी जिलाधिकारी है वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत पूरा प्रशासनिक अमला इस महामारी में काम कर रहा है… लेकिन पिछली बार के अधिकारियों को जनपद आज भी याद करता है। 2020 में कोरोना काल में जिलाधिकारी सुखलाल भारती तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार सिंह के स्थानांतरण होने के बाद मीडिया ने जो कुछ भी लिखा वह उनकी सोच रही होगी लेकिन मैंने कोरोना के विकराल रूप की तुलान पिछले कोरोना काल से की तो पाया कि साल 2020 में एसएसपी व डीएम शहर के हर कोने और हर चौहराहे पर क्षेत्र में जनता के बीच दिखाई दिए, चाहें वो आइसोलेशन वॉर्ड हो या फिर अस्थिाई रूप से बनाए गए कोरोना सेंटर, हर जगह इन जिम्मेदार अधिकारियों की मौजूदगी थी, लेकिन आज हालात पहले जैसे नहीं है। यहां का प्रशासन केवल आदेशों एवं उनके अनुपालन तक सीमित रह गया है, जनता के बीच में कोई भी अधिकारी नजर नहीं आ रहा है लॉकडाउन के दौरान स्थानीय पुलिस होमगार्ड के जवान अपनी ड्यूटी को निष्ठा पूर्वक अंजाम दे रहे है… वहीं पुलिस चेकिंग तो कर रही है लेकिन पहले जैसा माहौल नहीं दिखाई दे रहा। इन अधीनस्थ कर्मचारियों का मनोबल तब और ऊंचा हो जाता है जब उनके आला अधिकारी उनके समक्ष खड़े होते हैं इस बार का कोरोना पहले से ज्यादा खतरनाक और जानलेवा है वो इसलिए क्योंकि लोगों में संक्रमण तो बढ़ा ही है साथ ही साथ मौतों का आंकड़ा अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, वो एक कठिन वक्त था जो बीत गया… ये मुश्किल समय भी कट जाएगा… लेकिन इसकी डरावनी और दिल दलादने वाली यादी हमारे ज़हन में हमेशा जिंदा रहेंगी। हमें तीसरी लहर के लिए अपने आप को तैयार रखाना है और इस संकट को कैसे टाला जा सकता है इसके लिए देश-विदेश के वैज्ञानिक और डॉक्टर अपने अनुभवों को हमसे साझा कर आगाह कर रहे हैं। पिछली बार KNLS लाइव चैनल में जो कवरेज हमारी टीम ने की थी उसकी तस्वीर प्रस्तुत है।

एटा से निशाकांत शर्मा की रिपोर्ट

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks