पश्चिम बंगाल में अचानक राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं

पश्चिम बंगाल में अचानक राजनीतिक गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2 दर्जन से अधिक आई पी एस अधिकारियों को हटाते हुए कूचबिहार के पुलिस अधीक्षक को निलंबित कर दिया ।
वहीं दूसरी ओर भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से रिपोर्ट मांगी है । केंद्र ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजने की सूरत में इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा lअधिकारियों के मुताबिक राज्य सरकार से समय गवांए बिना ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने को भी कहा गया है । बुधवार को भेजे गए रिमाइंडर में गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से कहा कि तीन मई को राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर तत्काल रिपोर्ट तलब की गई थी।

अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने अब तक रिपोर्ट नहीं भेजी है. पत्र में कहा गया कि नवीनतम सूचना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाएं नहीं रुकी हैं और इसका अभिप्राय है कि राज्य सरकार ने इन्हें नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं. पत्र में कहा गया कि इसलिए बिना समय गवाएं इन घटनाओं को रोकने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने की जरूरत है. इसमें कहा गया कि तत्काल विस्तृत रिपार्ट गृह मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए।

पत्र के मुताबिक यदि राज्य सरकार रिपोर्ट नहीं भेजती है तो इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा. आक्रामक चुनाव प्रचार के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने लगातार तीसरी जीत दर्ज की, लेकिन रविवार को चुनाव नतीजे आने के बाद से ही पश्चिम बंगाल में हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं।

वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल करते हुए 29 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया. इनमें से अधिकतर का चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने तबादला कर दिया था जारी आदेश के तहत जिन शीर्ष स्तर के अधिकारियों की पुराने पदों पर बहाली की गई है, उनमें पुलिस महानिदेशक वीरेंद्र, अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) जावेद शमीम और महानिदेशक सुरक्षा विवेक सहाय शामिल हैं. राज्य सरकार ने कूच बिहार जिले के पुलिस अधीक्षक देबाशीष धर को निलंबित कर दिया है, जहां सीतलकूची सीट पर 10 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान सीआईएसएफ की कथित गोलीबारी में चार लोग मारे गए थे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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