
वेंटिलेटर 20, काम कर रहे सिर्फ छह
~कर्मचारी न होने की वजह से आपरेट करने में दिक्कत मुख्यमंत्री के भी संज्ञान में आ चुका है मामला~
एटा: स्वास्थ्य विभाग के पास अधिकांश वेंटिलेटर ऐसे हैं जो उपयोग में नहीं आ रहे। एक तरफ कोरोना को लेकर लोग परेशान हैं और वेंटिलेटर की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के पास वेंटिलेटर होते हुए भी कारगर नहीं। सबसे बड़ी बात यह है कि विभाग के पास कर्मचारियों की भारी कमी है।
पिछली बार कोरोना काल में जब बागवाला के एल-2 अस्पताल की स्थापना हुई, तब वेंटिलेटर की आवश्यकता महसूस की गई थी। धीरे-धीरे स्वास्थ्य विभाग को वेंटिलेटर मिलते गए और यह संख्या 20 तक पहुंच गई। इनमें से सिर्फ छह वेंटिलेटर ही इस समय काम कर रहे हैं। बागवाला के एल-2 अस्पताल में कोरोना के गंभीर मरीज भर्ती हैं और उन्हें आवश्यकता इस बात की रहती है कि वेंटिलेटर न होने की वजह से बाहर न जाना पड़े, लेकिन होता यही है। मरीज की जरा सी हालत बिगड़ी तत्काल ही डाक्टरों को रेफर करने की पड़ती है। रोगियों को आगरा, अलीगढ़, सैफई, नोएडा, गाजियाबाद जैसे अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। हालांकि हर किसी की क्षमता निजी अस्पतालों में मरीज को ले जाने की नहीं है फिर भी हायर सेंटर के लिए रेफर किया जाता है।
यहां सबसे बड़ी बात यह है कि वेंटिलेटरों का संचालन करने के लिए आपरेटर नहीं है। सिर्फ एक फिजीशियन की तैनाती है, लेकिन वे स्वयं कोरोना पाजिटिव हैं और उनकी पत्नी का भी निधन हो चुका है। ऐसे में वेंटिलेटर का संचालन कौन करे। हाल ही में सांसद हरनाथ सिंह यादव ने वेंटिलेटरों का संचालन न होने का मामला उठाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा था। इस मामले को लेकर सीएमएस डा. राजेश अग्रवाल ने अपनी सफाई भी दी थी। सीएमएस ने बताया कि वेंटिलेटरों के संचालन के लिए व्यवस्था की जा रही है और हमारी कोशिश है कि हम लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए काम कर सकें। कुछ वेंटिलेटर मैटरनिटी विग में बनाए जा रहे कोविड अस्पताल में भी संचालित करने की योजना है।