
अस्त हो गया साहित्य का सूरज- डाॅ0 राकेश सक्सेना
एटा। हिंदी ग़ज़ल व गीत के पुरोधा डाॅ0 कुँवर बेचैन के आकस्मिक निधन पर तूलिका साहित्यिक संस्था द्वारा ऑनलाइन शोक संवेदनाएँ साहित्यकारों ने व्यक्त की। गीतकार डॉ0 राकेश सक्सेना ने उनके अवसान को साहित्य की अपूरित क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने अनेक विधाओं में साहित्य का सृजन किया था। अनेक गीत संग्रह, ग़ज़ल संग्रह, महाकाव्य तथा उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। सशक्त हस्ताक्षर के विदा होने से साहित्य का सूरज अस्त हो गया है, उन्हें हम कभी भूल नही पायेंगे ।
इस अवसर पर डाॅ0 रामनिवास यादव, डाॅ0 सुनीता सक्सेना, डाॅ0 राजीव कुलश्रेष्ठ, मुकुट सक्सेना, डाॅ0 श्यामसनेही लाल शर्मा, डाॅ0 सुभाष दीक्षित, डाॅ0 आनंद गौतम आदि अनेक रचनाकारों व प्राध्यापकों ने उनके गीत-ग़ज़ल व संस्मरण सुनाते हुए ऑनलाइन भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।