
भारतवर्ष में 71 वर्षों में पहली बार होगी किसी महिला को फांसी
नईदिल्लीः भारतवर्ष में 71 वर्षों में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था। पहली बार एक महिला को फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद अब उसे किसी समय लागू किया जाना है। वैसे अब तक फांसी का दिन तय नहीं किया गया है। अपने ही परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोपी इस महिला का नाम शबनम है। उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के गांव में इस नरसंहार को अंजाम दिया था। घटना के बाद गिरफ्तार शबनम और उसके प्रेमी सलीम, दोनों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अदालत में दोनों को दोषी ठहराते
हुए फांसी की सजा सुनायी गयी है। उपलब्ध रिकार्ड के मुताबिक अगर शबनम को फांसी होती है तो 1955 के बाद किसी महिला को फांसी दिये जाने की यह पहली घटना होगी। वैसे शबनम ने अब तक हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार नहीं की है। उसकी तरफ से राष्ट्रपति को भी दया की भीख का आवेदन दिया गया था, जिसे राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया है। चर्चा है कि अब शबनम के पुत्र के माध्यम से फिर से राष्ट्रपति को आवेदन देने की तैयारी चल रही है।
वर्ष 2008 में 15 अप्रैल की रात इस घटना को अंजाम दिया गया था। अदालत ने इस मामले में 2010 में अपना फैसला सुनाया थी। बावन खेरी गांव के लोगों की नींद एक महिला के चिल्लाने के खुली थी। सबसे पहले पड़ोसी लतीफउल्लाह वहां शौकत अली के दो मंजिला मकान में पहुंचे थे। उन्होंने शौकत की लाश के बगल में ही शबनम को बेहोशी
की हालत में पाया था। लोगों ने वहां पहुंचकर देखा था कि सभी की लाशें पड़ी हुई थी और
किसी धारदार हथियार से सभी के सर काट दिये गये थे। भारतवर्ष में 71 वर्षों में ऐसी घटना चौंकाने वाली थी इस घटना के वक्त शबनम आठ सप्ताह की गर्भवती थी। बाद में जेल में ही उसने अपने बच्चे को जन्म दिया है। अब वह बच्चा 12 वर्ष का है और अपने पालक पिता के पास है। अदालत के दस्तावेजों में इस बात का उल्लेख है कि शबनम ने अपने घर के लोगों के लिए चाय बनाते वक्त उसमें नींद की दवा मिला दी थी। यह चाय पीकर जब पूरा परिवार बेहोश हो गया तो उसने अपने प्रेमी सलीम को बुलाया और सभी का गला काट दिया था। बताया गया है कि घटना के अगले दिन सलीम ने पास के एक दुकानदार बिलाल अहमद के पास अपना दोष स्वीकार किया था। अदालत में भी बिलाल ने इसकी गवाही दी है। बिलाल की गवाही के मुताबिक शबनम एक के बाद एक के सर को पकड़ रही थी और उनका गला काट रही थी। घटना के बाद पास के एक तालाब से पुलिस ने वह कटार भी बरामद की थी,
जिससे हत्या की गयी थी। इसके साथ ही शबनम के पास से नींद की दवा के खाली पैकेट भी बरामद किये गये थे। वैसे इस मामले में पहले तो शबनम ने घर में डकैती होने की बात
कही थी। बाद में उसने सारा दोष सलीम पर मढ़ने का काम किया था। पुलिस की जांच में
यह स्पष्ट हो गया कि घर की ऊंची छत से किसी का अंदर आना संभव नहीं था। इसके अलावा लोहे का मजबूत दरवाजा अंदर से बंद था। वहां पर किसी के ऊंगलियों के निशान
भी नहीं मिले थे। इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुलिस ने आरोप लगाया था कि दरअसल
शबनम ने बेहोश होने का नाटक किया था ताकि उस पर किसी को शक नहीं हो। मथुरा के
जेल में बंद शबनम की फांसी इस लिहाजा से भारत में किसी महिला की पहली फांसी होगी।