एंबुलेंस नहीं मिलने पर बेटा हुआ मजबूर, पिता का शव कार में बांधकर पहुंचा श्मशान घाट

@रामराज! एंबुलेंस नहीं मिलने पर बेटा हुआ मजबूर, पिता का शव कार में बांधकर पहुंचा श्मशान घाट

देश में कोरोना कहर बनकर टूट पड़ी है। मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ऑक्सीजन की कमी और समय पर एंबुलेंस नहीं मिल रही है। श्मशान घाट में शवों की लाइन लग रही, जबकि कब्रिस्तान में जगह नहीं है। अब एक दुखद मामला उत्तरप्रदेश के आगरा शहर से आया है। यहां ताजगंज श्मशान घाट पर हर दिन 35 से ज्यादा शव आ रहे हैं। हालत इतनी नाजुक है कि बॉडी को ले जाने के लिए एंबुलेंस कम पड़ रही है। तीन-चार शव एक-एक एंबुलेंस में लाने पड़ रहे हैं। ऐसे में एक युवक अपने पिता के शव को कार के ऊपर बांधकर श्मशान पहुंचने को मजबूर हो गया।

दरअसल शनिवार को जयपुर हाउस में रहने वाले शख्स को काफी प्रयत्न के बाद एंबुलेंस नहीं मिली। जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो युवक ने पिता के शव को कार के ऊपर बांधा और दाह संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचा। अंतिम संस्कार का समय मिलने पर बेटे ने शव को कार की छत से उतारकर नीचे रखा। ताजगंज श्मशान घाट के विद्युत शवदाह गृह की चिमनियां हर दिन बिना रुके चल रही है। शनिवार को 50 डेड बॉडी पहुंची थी। शाम होने तक अंतिम संस्कार की वेटिंग 5 से 6 घंटे तक रही।

विद्युत शवदाह गृह के प्रभारी संजीव गुप्ता का कहना है कि शव बिना रूके लगातार आ रहे हैं। सुबह से रात तक सिलसिला बना रहा है। हमारी कोशिश रहती है कि अंतिम संस्कार के लिए लोगों को कम से कम इंतजार करना पड़े। सेवक 20-20 घंटे काम कर रहे हैं। वहीं कैलाश मोक्षधाम पर एक दिन में एक या दो शव अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा करते थे। अब हर दिन 10 से ज्यादा शव आ रहे हैं। मोक्षधाम पर काम करने वाले एक शख्स ने कहा कि बीते दिनों शवों की संख्या में इजाफा हुआ है। एक दिन में पहले कभी नहीं आते थे। अब शाम तक शव आ रहे हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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