
देश के बदहाल हेल्थ सिस्टम का जिम्मेदार आखिर कौन?
कोरोना संक्रमितों के आयेदिन आ रहे आंकड़े खौफनाक
वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के कारण हर तरफ मौत का मंजर पसरा हुआ है देश के हर कोने में कोरोना से लोग मर रहे हैं लेकिन देश के सियासत दान लाशों के ढेर पर अपनी चुनावी रोटियां सेंकने में व्यस्त हैं, हेल्थ सिस्टम भगवान भरोसे चल रहा है क्योंकि हेल्थ सिस्टम को संभालने वाले लाखों की भीड़ इकट्ठी कर चुनावी रैलियों का आनंद ले रहे हैं। हालात यह हैं कि अपनी सुरक्षा स्वयं कर सको तो कर लीजिए अन्यथा आप कोरोना संक्रमित हो जाते हैं तो आपको किन हालातों से गुजरना पड़ेगा उसको जानने और सुनने वाला कोई नहीं होगा इसका अंदाजा आप देशभर से आ रहीं खबरें देखकर लगा सकते हैं आॅक्सीजन की कमी, बेड की कमी, अस्पताल की कमी और कोरोना से मृत्यु हो गई तो श्मसान से लेकर लकड़ियों की कमी से जूझना पड़ेगा।
वैसे तो सरकार कोरोना से निपटने के लिए क्या कर रही है देश देख रहा है, सरकारें करोड़ों रुपए विज्ञापन में यह बताने में खर्च कर रही हैं कि दो गज की दूरी मास्क जरूरी लेकिन वही सियासत दान चुनावी रैलियों में ना दो गज की दूरी और मास्क जरूरी का पालन कर रहे हैं।
कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि कोरोना ने हमारे देश के हेल्थ सिस्टम की पोल खोल दी है, “मरीज ले जाने के लिए एबुलेंस नहीं है, मरीज अस्पताल पहुंच जाए तो अस्पताल में बेड नहीं है, अस्पताल में बेड मिल जाए तो ऑक्सीजन नहीं है, ऑक्सीजन मिल जाए तो डॉक्टर नहीं, डॉक्टर है तो नर्सिंग स्टाफ नहीं, नर्सिंग स्टाफ मिल जाए तो बाज़ार में इंजेक्शन नहीं।”
आखिर ऐसी बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सोशल मीडिया में जमकर सरकार की आलोचना की जा रही है क्यों आलोचना की जा रही है इसका जबाव आलोचकों के पास भी नहीं है, मेरा मानना है कि क्या हमने वोट स्वास्थ्य, शिक्षा को लेकर दिया था नहीं हमने वोट मंदिर मस्जिद को लेकर दिया था जिसको लेकर सरकार काम कर रही है इसलिए स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकार को कोसने का अधिकार हमें बिल्कुल नहीं हैं।