गए थे जीवन की आस में निकले लाश बन कर

ताबड़तोड़ मृत्यु के चलते अस्पताल बना यमराज का कैम्प कार्यालय

जिंदगी का मुकदमा हार गए न्यायाधीश

घर-घर बीमार : घबराहट अपरंपार

मिर्जापुर । स्वास्थ्य-सुविधाओं की चरमाई व्यवस्था से मानव-जीवन को बीमारियों से गंभीर चुनौतियां मिल रही हैं। विज्ञान-क्रांति के दौर में सामान्य बीमारियों का इलाज नहीं हो पा रहा है। इसी बीच कोरोना एक तो तितलौकी दूसरे नीम चढ़ी मुहावरे को चरितार्थ कर रहा है।

मौत का कैम्प कार्यालय बना अस्पताल

19/20 अप्रैल की रात मंडलीय अस्पताल से ताबड़तोड़ मृत्यु का सर्टिफिकेट जारी होते देखकर प्रथम दृष्टया तो यही लगता है कि इस स्थल को यमराज ने अपना कैम्प कार्यालय बना लिया है।

गए थे जीवन की आस में निकले लाश बन कर

रविवार को चील्ह ब्लाक के तिलठी ग्राम निवासी पूर्व मेडिकल ऑफिसर डॉ राजदेव दुबे के भतीजे आनन्द (49)आक्सीजन के अभाव में चल बसे। इनके बेहतर इलाज के लिए यहां के अनेक प्रबद्ध लोगोंका प्रयास निरर्थक सिद्ध हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों ने फोन तक नहीं रिसीभ किया। आक्सीजन जैसे जैसे लो होता गया, अस्पताल की व्यवस्था तथा डॉक्टरों की मानवीय-संवेदनाएं भी रसातल जाने लगी तो आनन्द को ब्रह्मलोक जाने से कैसे रोका जा सकता था? आनन्द की तीन बेटियां और कक्षा 12 में पढ़ने वाला किशोर पुत्र है।
इसी रात वरिष्ठ अधिवक्ता नागेश्वर सिंह (62) चंद दिनों की बीमारी के बाद अस्पताल में एडमिट किए गए लेकिन बचाए नहीं जा सके। वे जमालपुरके निवासी थे।
इसी रात विकास विभाग से सेवानिवृत्त वरिष्ठ लिपिक राजेन्द्र शुक्ल (62)भी जीवन रक्षा के लिए बने अस्पताल में जाकर भी नहीं बच सके। ये वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज शुक्ल के चचेरे भाई थे ।

जीवन के लिए जूझ रहे रेंज आफिसर वाराणसी भर्ती किए गए

मड़िहान के रेंज आफिसर पी के मिश्र कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे। असक्सीजन लेविल लो होते होते 20 आ गया। इनके इलाज के लिए DFO सक्रिय हुए। राज्यमंत्री श्री रमाशंकर पटेल के प्रयास से वाराणसी भुल्लनपुर के निजी अस्पताल में 19/4 को भर्ती हो सके। मंगलवार को आक्सीजन का स्तर 57 हुआ। वन विभाग के लोग इनके स्वस्थ होने की कामना करते देखे गए। अस्पताल में पुत्र विक्की इलाज की व्यवस्था में लगा है।

कोरोना के इजलास पर मुकदमा हार गए न्यायाधीश

कचहरी के पास जिला पंचायत आफिस के सामने रहने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता ओमप्रकाश चौधरी के भांजे राजीव सिंह कोरोना के इजलास पर जिंदगी का मुकदमा हार गए। वे बदायूं में CJM थे । छानबे क्षेत्र के जोपा ग्राम के मूल निवासी थे।

घर-घर लोग बीमार : घबराहट अपरंपार

हाहाकार के इस दौर में घर-घर थोक भाव में लोगबाग खांसी, सर्दी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं। कोरोना का आतंक न होता तो शायद इसे सामान्य बीमारी लोग मानकर उपचार कराते लेकिन इन दिनों इस तरह की बीमारी से कंपकंपी बढ़ जा रही है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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