
कोतवाल की दबंगई एक पत्रकार के साथ गाली – गलौज करते हुए की मारपीट ।
पत्रकार के प्रति पुलिस ने दिखाई दबंगई, कहा- तुम्हारा जीना मुश्किल कर देंगे !
भदोही ।देशभर में पत्रकारों पर लगातार हो रहे हमलों के बीच मंगलवार को जनपद के कोतवाली भदोही में पत्रकार के प्रति पुलिस की दबंगई एक बार फिर देखने को मिली है। जानकारी के मुताबिक, एक दैनिक अखबार के ब्यूरो जोकि भदोही की तरफ से अपने घर को जा रहा थे, उनको रास्ते में अपने मित्र पत्रकार के यहां रुक कर दवा लेना भारी पड़ गया। बताते चले की अपने दफ्तर से देर रात लौट रहे एक दैनिक अखबार के ब्यूरो ने अपने जिला क्राइम संवाददाता के घर पर पहले से ही खरीद कर रखी बुखार व खासी की दवा को लेने पहुंचे और बात करने लगे तब तक वहा पर भदोही कोतवाल सदानंद अपने हमराहीयों के साथ आ पहुंचे और पत्रकारों से पूछताछ करने लगे जब पत्रकारों ने अपना परिचय दिया कि मैं पत्रकार हूं इतने में भदोही कोतवाल पत्रकार के मुंह से पत्रकार नाम सुनते ही आग बबूला हो गए और दबंग कोतवाल ने अपने हमराहीओं के साथ मिलकर पत्रकार को गाली – गलौज देते हुए लात- घुसो से पीटते हुए कपड़े भी फाड़ दिये । जिससे मारपीट के दौरान पत्रकार के गुप्तांग और कान पर गंभीर चोटें आई हैं।इतना ही नहीं, भदोही कोतवाल सदानंद की दबंगई इतने पर भी नहीं रुकी वह पत्रकार का मोबाइल भी छीन कर उसके मोबाइल भी तोड़ दिये। जिससे पत्रकार कहीं पर संपर्क ना साध सके । इसके बाद कोतवाली पुलिस पत्रकार को बेज्जत करते हुए वाहन में भरकर कोतवाली ले गई और वहां पर उसको घंटों बिठाई रखी ।कहा कि- हम तुम्हारा जीना मुश्किलकर देंगे। घटना 13 अप्रैल दिन मंगलवार ग्राम डुढवा धरम पूरी के पास का है।इतना ही नहीं, कोतवाल ने पत्रकार को झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी और गाली-गलौज करते हुए यह भी कहा, ‘तुमको अन्दर कर देंगे और और तुम्हारा जीना मुश्किल कर देंगे।’ जबकि इस वैश्विक महामारी में प्रत्येक चैनल व अखबार के पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर समाचार संकलन कर रहे हैं, उसके बावजूद यह नतीजा देखने को मिल रहा है।
जनता से दूरी बढ़ा रही पुलिस
पत्रकारों ने मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किए जाने की मांग करते कहा है कि पत्रकारों की हत्या व उनसे मारपीट की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। पुलिस इस प्रकार का कृत्य कर जनता से दूरी बढ़ा रही है। ज्ञात हो कि जहां दुनिया के तमाम विकसित देशों में फे्रंडली पुलिसिंग की अवधारणा पर पुलिस चल रही है। वहीं भारतीय पुलिस आज भी ‘वर्दी वाला गुंडा’ के इमेज से उबरती नजर नहीं आ रही है। पुलिसकर्मियों के द्वारा कभी बस अड्डे में खड़े शिक्षक की पिटाई कर दबंगई दिखाई जाती है तो कहीं महिला से मारपीट की जाती है। जान जोखिम में डालकर नक्सली चंगुल से पुलिस कर्मियों को रिहा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मीडियाकर्मियों के साथ हिंसक व अमानवीय व्यवहार दुर्भाग्यजनक है।