
यूपी: जब बेटी को देना पड़ा दुष्कर्मी पिता के बच्चे को जन्म, दिल को झकझोर देगी पीड़िता की कहानी
एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी को हवस का शिकार बनाया। सात महीने तक उसका यौन शोषण किया। बेटी डरी-सहमी रहने लगी। मां को शक हुआ तो उसने पूछताछ की। आखिरकार बेटी मां के गले में लिपटकर फूट-फूटकर रोई और कलयुगी पिता की काली करतूत को बता दिया।
मां ने ममता का साथ दिया और फैसला लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह अपने पति को सजा जरूर दिलवाएगी। पीड़िता को इंसाफ तो मिल गया, लेकिन बेटी को एक ऐसा दंश मिला जिसकी कल्पना करने से ही रूह कांप जाती है। उसे अपने पिता के बच्चे को जन्म देने पर विवश होना पड़ा।
इस घटना की रिपोर्ट 4 मई 2019 को मथुरा के थाना गोविंदनगर में दर्ज कराई गई थी। इस मामले में सोमवार को अदालत ने नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाले पिता को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई। उस पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
थाना गोविंद नगर क्षेत्र की एक कॉलोनी में दो साल पहले मजदूर परिवार में यह घटना घटी। मजदूर पिता ने अपनी 15 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया। उसने सात महीने में कई बार इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया। जब बेटी गर्भवती हो गई तो उसकी मां को घटना का पता चला।
डॉक्टरों ने कहा था- अब नहीं हो सकता गर्भपात
जब मामला संज्ञान में आया तब तक बहुत देर हो चुकी थी। न्यायालय के आदेश पर पुत्री का गर्भपात कराने के लिए सीएमओ के निर्देशन में टीम का गठन किया गया। टीम ने न्यायालय को रिपोर्ट दी थी कि यदि गर्भपात कराया गया तो बेटी के जीवन को खतरा हो सकता है।
इसे देखते हुए पीड़ित पुत्री ने दुष्कर्मी पिता के बच्चे को जन्म दिया। एडीजीसी सुभाष चतुर्वेदी ने बताया कि जब मामला संज्ञान में आया तो उस समय 28 सप्ताह छह दिन का गर्भ था। इसके कारण पीड़िता का गर्भपात नहीं हो सका। उसे बच्चे को जन्म देना पड़ा।
पति को जेल भिजवाकर बेटी को दिलाया इंसाफ
दुष्कर्म के मामले में आरोपी पति को जेल भिजवाने के बाद पूरी जिम्मेदार पीड़िता की मां पर थी। लेकिन वह अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए चट्टान की तरफ खड़ी रही। तमाम दबावों को उसने दरकिनार कर दिया।
एक ही लक्ष्य था कि दुष्कर्मी को कर्मों की ऐसी सजा मिले, ताकि लोग सबक ले सकें। अपर सत्र न्यायाधीश विशेष न्यायाधीश पॉक्सो-2 जहेंद्र पाल सिंह ने पीड़िता के दोषी पिता को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है।