
कोरोना काल में सरकारी कर्मचारी की आर्थिक स्थिति:
रिपोर्ट लगाने के नाम पर अमीन ने रिश्वत में मांगा एक हाफ
एटा। जिलाधिकारी डॉ विभा चहल भ्रष्टाचार को लेकर भले ही कितने सख्त तेवर दिखा रहीं हों लेकिन सरकारी विभागों में इसका असर बिल्कुल देखने को नहीं मिल रहा है। वैसे तो सरकारी महकमें रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का दूसरा नाम होते हैं लेकिन बात करें कोरोना काल की तो इसमें प्रत्येक व्यक्ति की आर्थिक स्थिति बिगड़ी है लेकिन सरकारी कर्मचारियों की ऐसी स्थिति बदहाल हो जाएगी ऐसा सोचा ना था कि उन्हें रिश्वत में एक हाफ मांगना पड़ जाएगा ऐसे हालात जरूर चिंताजनक हैं।
दरअसल मामला तहसील सदर एटा का है जहां सदर तहसील में कार्यरत अमीन विवेक कुमार यादव एक व्यक्ति से प्रमाण पत्र हेतु रिपोर्ट लगाने के लिए रिश्वत में मात्र एक हाफ की मांग कर रहे हैं और कह रहे हैं सौ रुपए में रिपोर्ट नहीं लगाऊंगा साथ ही प्रधान प्रत्याशी से प्रमाण पत्र पर रिपोर्ट लगाने के लिए पांच सौ रुपए लेते हैं बस ऐसे ही हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त भारत बन रहा है।