
हत्या में दोषी पति-पत्नी समेत चार को आजीवन कारावास
~25-25 हजार रुपया जुर्माना भी आठ साल पूर्व चमरपुरा में हुई वारदात~
एटा: अवागढ़ थानाक्षेत्र में राजवीर हत्याकांड के मामले में बुधवार को अदालत ने पति-पत्नी समेत चार को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 25-25 हजार रुपये जुर्माने से भी दंडित किया।
गांव चमरपुरा के मजरा मीसाकलां निवासी रेखा उर्फ रूमा, उसके पति राजकपूर व परिवार के नबाव सिंह एवं नाहर सिंह के खिलाफ आरोप था कि 29 मार्च, 2013 को शाम सात बजे से गांव निवासी राजवीर की उस समय हत्या कर दी जब वह रामपाल के दरवाजे से गुजर रहा था। पुलिस ने घटना की पृष्ठभूमि में आरोपित रेखा और मृतक की पत्नी सुमन के बीच मवेशी बांधने पर हुआ विवाद बताया था। रिपोर्ट मृतक के भाई भानुप्रताप ने दर्ज कराई थी। एडीजीसी योगेंद्र कुमार व एडीजीसी प्रदीप गुप्ता ने अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान कराए तथा बहस की। दोनों पक्षों की बहस को सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित न्यायालय रितेश सचदेवा ने चारों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास के साथ 25-25 हजार रुपये जुर्माने का दंडादेश सुनाया। अवैध असलहा रखने के मामले में पांच साल की कैद:
एडीजीसी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि अदालत ने आरोपित राजकपूर को अवैध असलहा रखने के मामले में भी दोषी करार देते हुए पांच साल के कारावास व पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। नाबालिग को भगाने वाले को कारावास
एटा: अपर सत्र न्यायाधीश पोक्सो एक्ट ने नाबालिग को भगा ले जाने के मामले में एक को दोषी करार देते हुए डेढ़ साल के कारावास की सजा सुनाई। 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
अदालत में मारहरा थाना पुलिस ने बदायूं जिले के उघैती थानाक्षेत्र के गांव कोठा-नाधा निवासी भुवनेश के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में पेश किया था। इसमें आरोप था कि आरोपित भुवनेश छह अगस्त, 2019 को दोपहर 12 बजे थानाक्षेत्र के एक गांव से नाबालिग को बहला फुसलाकर भगा ले गया। 21 नवंबर, 2019 को पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता के बयान कराए। एडीजीसी शांतनु पाराशर द्वारा गवाह पेश किए गए। अपर सत्र न्यायाधीश कुमार गौरव में आरोपित को दोषी करार देते हुए दंडादेश सुनाया।