एटा में आपरेशन कायाकल्प से लौटे चित्रकारों के दिन

एटा में आपरेशन कायाकल्प से लौटे चित्रकारों के दिन
~खाली हाथों को फिर मिल रहा है अच्छा काम शहर ही नहीं बने ग्रामीण पेंटर के घरों में भी खुशियां~
एटा: दीवारों पर पेंटिग करने वाले चित्रकारों के भी पुराने दिन लौटे हैं। स्कूलों के आपरेशन कायाकल्प से उनके हाथों में फिर से काम आया है। रोजगार में फिर से रंग खिलने से चेहरों पर खुशी लौटी है। स्कूलों में वाल (बिल्डिग एज लर्निंग एड) पेंटिग की अनिवार्यता के बाद हर क्षेत्र के चित्रकारों की डिमांड बड़ी है। यही वजह है कि महीनों से उनकी व्यस्तता कम नहीं है। वह मानते हैं कि कुछ इसी तरह काम चलता रहा तो उनकी खुशियां लौट आएंगी।

दशक पूर्व दीवारों पर पेंटिग करने वाले चित्रकारों का हुनर उनके प्रयोग की जुगत के लिए बेहतर था। कभी अपने हुनर की बेहद डिमांड के चलते अच्छी आमदनी तथा उन्हें हुनर पर नाज था। समय के बदलाव तथा फ्लेक्स बोर्ड सहित अन्य सस्ते संसाधन बढ़ना शुरू हुए तो इन पेंटर की डिमांड कम होती गई। धीरे-धीरे उनके हाथ से काम निकलता गया और स्थिति यह आ गई कि उन्हें जीविका चलाने के लिए दूसरा रोजगार ढूंढने के लिए मजबूर होना पड़ा। कुछ समय सरकारी काम मिला, लेकिन वहां भी फ्लेक्स बोर्ड ने उन्हें झटका दिया। जिले में नामी चित्रकार खर्चा पूरा न कर पाने की वजह से प्रतिष्ठान बंद कर घर से ही काम करने को मजबूर हुए। आपरेशन कायाकल्प ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के चित्रकारों की डिमांड फिर बढ़ा दी है। स्कूलों की दीवारों पर लर्निंग चित्रकारी ने एक बार फिर उन्हें अच्छा काम दिलाया है। इस साल चित्रकार स्कूलों से मिल रहे रोजगार से खुश हैं। स्कूलों को बेहतर बनाने की होड़ से चित्रकार अपने छूटे हुनर को निखार रहे हैं। स्कूलों में 5000 से 15000 तक के काम मिले हैं। मानते हैं कि सरकार कुछ ऐसे ही विकल्प दे तो उनका हुनर जिदा रहे और पेट भी पलता रहेगा।

  • सात-आठ सालों में पेंटिग का हुनर फ्लेक्स के प्रचलन ने बर्बाद कर दिया था। रोजाना की मजदूरी भी निकालना मुश्किल था। इस साल स्कूलों के मिल रहे काम से रोज 2000 तक आमदनी हो रही है। दिलीप सिंह
  • विद्यार्थी जीवन से चित्रकारी को ही रोजगार बना लिया था, लेकिन पछतावा 10 साल पहले से शुरू हुआ जब हाथ से काम जाने लगा। इस बार स्कूलों की पेंटिग ने खुशियां वापस लौटा दी है। उम्मीद है कि ऐसे ही काम आगे मिला तो अच्छे से गुजारा होता रहेगा।

महेंद्र सिंह अनमोल जिले में सरकारी स्कूल

  • प्राइमरी स्कूल-1365
  • जूनियर हाईस्कूल-561
  • प्राइवेट मान्यता प्राप्त स्कूल-830

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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