
क्या एक ही शराब माफिया है जिले में ?
दूसरे शराब माफियाओं पर कब कसेगा शिकंजा
एटा। थाना देहात कोतवाली में शराब कांड को लेकर जनपद पुलिस की जमकर किरकिरी होने के बाद भी पुलिस द्वारा शराब माफियाओं को लेकर जिस तरह की कार्यवाही दिखनी चाहिए थी वो जमीनीस्तर पर नहीं दिखी। यही कारण है कि होली के दिन गांव-गांव प्रत्याशियों द्वारा गुपचुप तरीके से जमकर शराब बांटी गई, शराब माफिया बंटू यादव फिलहाल पुलिस के शिकंजे में है लेकिन शहर में अब चर्चा यह है कि तो क्या अकेला बंटू यादव ही अवैध शराब का कारोबार करता है और इसका मतलब यह समझा जाए कि अब अवैध शराब का कारोबार बिल्कुल जड़ से समाप्त हो चुका है अगर पूरे जनपद में एक ही शराब माफिया है और पुलिस ने उसपर शिकंजा कस लिया है तो यह पुलिस की बहुत बड़ी जीत होगी लेकिन इसके अलावा और भी जनपद में शराब माफिया हैं और वो आजाद घूम रहे हैं तो यह शराब माफिया चुनाव में जनपद पुलिस की भद्द जरूर पिटवाएंगे शायद उसके बाद पुलिस यह ना कह पाएगी कि शराब चूहा पी गए।
फिलहाल बंटू यादव की गिरफ्तारी दूसरे अवैध शराब कारोबारियों के लिए वरदान बन गई है क्योंकि बंटू यादव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की अभी कोई कार्यवाही दूसरे शराब माफियाओं पर नहीं दिखी है या फिर यह कह सकते हैं कि जनपद पुलिस फिलहाल दूसरे शराब माफियाओं पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं करना चाह रही है, जनपद में अंतर्राज्यीय शराब के अलावा कच्ची शराब का कारोबार जमकर होता आ रहा है कच्ची शराब ने 18 जुलाई 2016 में जो कोहराम मचाया उसे जनपदवासी कभी नहीं भूल सकते कच्ची शराब ने अलीगंज क्षेत्र में करीब 30 लोगों को मौत के मुंह सुला दिया था।
नवागत एसएसपी के लिए जिलेभर में फैले अवैध अंतर्राज्यीय शराब के अलावा कच्ची शराब के कारोबार पर शिकंजा कसना बेहद ही जरुरी है क्योंकि चुनावी माहौल में अवैध शराब कारोबारियों का खुले आजाद घूमना किसी चुनौती से कम नहीं।