फर्जी बीएलओ की शिकायत पर पूर्व प्रधान समेत दो को भेजा जेल

फर्जी बीएलओ की शिकायत पर पूर्व प्रधान समेत दो को भेजा जेल
फर्जी वोट बनाने की शिकायत पर फर्जी बीएलओ ने मारपीट का लगाया था झूंठा आरोप
पूर्व प्रधान की पत्नी ने फर्जी बीएलओ की डीएम से की शिकायत
डीएम के आदेश के बाद भी नहीं हुआ वोर्ड द्वारा पुनः परीक्षण
क्षेत्राधिकारी पर बिना जांच के चार्जसीट लगाने का आरोप
बिना किसी सरकारी पद पर रहते हुए भी बना दिया फर्जी बीएलओ
पूर्व प्रधान की पत्नी ने डीएम व मुख्यमंत्री से शिकायत कर लगाई न्याय की गुहार
एटा। निधौलीकलां के ग्राम रूपसपुर में ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर प्रधान व प्रधान पद के प्रत्याशी द्वारा एक षड्यंत्र के तहत फर्जी वोट बनवाने का मामला सामने आया है। प्रधान द्वारा डीएम व मुख्यमंत्री से शिकायत की कि एक फर्जी बीएलओ दो स्थान पर काम कर रहा है। डीएम द्वारा भेजी गई जांच टीम जांच करती उससे पहले फर्जी बीएलओ ने बनाए गए वोटों की निरस्तीकरण की रिपोर्ट तहसील में देकर कोतवाली नगर में रिपोर्ट दर्ज करा दी।
इस शिकायत पर पूर्व के सीजनल अमीन की संविदा समाप्त हो गई। सांठ गांठ कर चिकित्सीय परीक्षण में चोटें दिखाकर प्रधान व उसके एक साथी को पुलिस ने जेल भेज दिया। इस घटनाक्रम का मास्टरमाइंड हारे प्रत्याशी का पति है। जेल भेजे पूर्व प्रधान बृजेश की पत्नी रीनेश ने बताया कि वर्तमान में उसकी सास सरस्वती देवी प्रधान हैं। इससे पहले ब्रजेश प्रधान थे। गांव के निवासी विक्रम की पत्नी गीता चुनाव हार गई थी तभी से विक्रम रंजिश मानता चला आ रहा है।
आने वाले त्रिस्तरीय पंचायत के लिए फर्जी बीएलओ नवलकिशोर से मिलकर भारी संख्या में फर्जी वोट बनवा लिए थे, जिसकी शिकायत ब्रजेश द्वारा डीएम से की गई। डीएम ने तीन लेखपालों की जांच टीम तो बना दी लेकिन आज तक जांच नहीं की गई। जब ब्रजेश ने 17 फरवरी को शिकायत की तो जांच के लिए उन्हें तहसील बुलाया। जहां उन्हें नबल किशोर जो जांच के समय सीजनल अमीन नही था और उसकी अवैध तरीके से नियुक्ति सुलेखा की रजिस्ट्रेशन आईडी पर कर दी गई। एक आईडी पर दो नियुक्ति हो गईं, जबकि यह नियुक्ति राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा की जाती है।
ब्रजेश की शिकायत से फर्जी बीएलओ नवलकिशोर रंजिश मानने लगा और ब्रजेश के खिलाफ फर्जी मुकदमा कोतवाली नगर मंे दर्ज करा दिया। इस केस में ब्रजेश व उनके साथी को जेल भेज दिया गया। क्षेत्राधिकारी पर भी ब्रजेश के उत्पीडन का आरोप है लगाते हुए कहा कि बिना साक्ष्यों के चार्जसीट दाखिल की गई है। हॉस्पीटल में हुई डाक्टरी रिपोर्ट 22 फरवरी को क्षेत्राधिकारी के यहां आई, चिकित्सक ने सीटी स्केन कराने की एडवाइज दी गई जो आज तक नहीं कराई गई।
पीड़िता रीतेश देवी ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से पुनः न्याय की गुहार लगाई है। जिलाधिकारी ने पीडित के फर्जी डाक्टरी की शिकायत पर सीएमओ को वोर्ड बनाकर पुनः जांच करा तीन दिन में रिपोर्ट मांगी गई किन्तु जब 10 दिन बाद भी पुनः डाक्टरी वोर्ड से होने की रिपोर्ट नहीं मिली तो जिलाधिकारी ने पुलिस से फर्जी बीएलओ नवल किशोर को पकड़बाकर डाक्टरी कराने के आदेश दिए गए। साथ ही बीएलओ की फर्जी नियुक्ति की जांच अपर जिलाधिकारी केशव कुमार को दी गई है। पूरे प्रकरण की पुनः जांच कराने से घटनाक्रम में एक नया मोड आता दिख रहा है। जिससे फर्जी बीएलओ, चिकित्साकर्मी, क्षेत्राधिकारी की जांचों की पुनः विवेचना से पीड़िता को न्याय मिलने की आशा जागी है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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