बंगाल में भाजपा ने कियूँ लगाई है पूरी ताक़त ?

बंगाल में भाजपा ने कियूँ लगाई है पूरी ताक़त ?

बंगाल जीतना कोई एक राज्य में सरकार बनाना मात्र नहीं है बल्कि एक ऐसे प्रदेश को देश की मुख्यधारा में लाना है जो कि अब पूरी तरह से देशद्रोहियों और अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों का अड्डा बन चुका है
इससे पहले कभी आपने देखा है कि बीजेपी और उनके बड़े-बड़े नेता हर दूसरे दिन बंगाल का दौरा कर रहे हैं
प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी बंगाल में बीस चुनावी सभा करेंगे और अमित शाह के 50 दौरे
महज बंगाल में सरकार बनाने के लिए नहीं हो रहे हैं

चिकन नेक याद होगा ना..
CAA के खिलाफ आसाम को काट देने की धमकी दी थी एक सिरफिरे ने शाहीन बाग में
यह चिकन नेक का एक हिस्सा बंगाल से हो कर जाता है।और किसी राजनीतिक पार्टी ने उस सिरफिरे शरजील की महत्वाकांक्षी का खुलकर विरोध नही किया ,क्योंकि उनके लिये वोट बैंक पहले है और देश बाद मे।

सामरिक रुप से देश को देखिये..
आप देश का नक्शा देखेंगे तो सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उत्तर पूर्व के राज्यों को बंगाल की एक छोटी सी पट्टी जोड़ती है यदि यह पट्टी काट दी जाए तो उत्तर पूर्व के असम सहित अन्य राज्यों से भारत के mainland से सम्पर्क कट जाएगा और भारत एक महत्त्वपूर्ण सामरिक बढ़त खो देगा .जैसे कश्मीर हमारे देश का मुकुट है वैसे ही उत्तर पूर्व राज्य हमारी गर्दन है.उत्तर पूर्व के राज्य हमारे दुश्मन चीन सहित बहुत सारे देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर स्थित है और सामरिक दृष्टि से देखा जाए तो यह देश की सुदृढ़ सुरक्षा के लिए बहुत ही महत्त्वपूर्ण है,
शरजील इमाम उसी गर्दन को काटने की बात कर रहा था और इसके लिए बंगाल पर देशद्रोहियों की कुदृष्टि है बंगाल में राष्ट्रवादियों की जीत बहुत आवश्यक है।
सालो पहले हुआ बंग भंग (बंगाल के दो टुकड़े किए गए थे, जो कि पहले पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था और अब बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है) एक बार फिर से दोहराने के लिए सारी देश विरोधी शक्तियां एकजुट होकर सक्रिय हैं

सिंधू बॉर्डर पर अब 50 किसान भी नहीं हैं
जैसे ही मीडिया के कैमरे हटे सिंघू बॉर्डर से कथित किसान भी हट गए.हालत ये है कि जितने वहाँ किसान नहीं उससे कई गुना ज़्यादा तंबू कनात लगे हुए हैं
सीधा सा मतलब मीडिया का रोल छोटा-मोटा आंदोलन खड़ा करने के लिए भी काफ़ी ज़्यादा होता है

  • कवरेज का असर ये होता है कि टीवी पर दिखने के लिए भी लोग उतावले हो जाते हैं
  • जो उतावले थे वो अब घर चले गए पिछले दिनों जब किसी ने राकेश टिकैत से पूछा कि लोग कहाँ गए तो उन्होंने कहा कि लोग खेती करने गए
  • यानी कि राकेश टिकैत के पास भी अब कोई ठोस जवाब नहीं है कि भीड़ क्यों कम हुई ?
  • राकेश टिकैत मीडिया अब बंगाल पहुँचकर ममता दीदी के प्रचार में लग गये है ,अगर देखा जाए तो कुल मिलाकर आंदोलन में आंदोलनकारी ही नहीं हैं!बाक़ी एसी कूलर और मनोरंजन की पूरी व्यवस्था है

प्रशान्त……नाम सुना होगा

क्या आपको नही लगता रोहंगिया से ज्यादा घातक इस देश के लिए प्रशांत भूषण जैसे गद्दार हैं?
प्रशांत_भूषण ने देश से सरकार द्वारा भगाए जा रहे रोहिंग्या मुसलमानो को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट मे PILदाखिल की
रोहंगिया को बाहर भगाने से पहले इस देश से प्रशांत जैसों को भगाना उतना ही जरूरी है,

उत्तर प्रदेश मे योगी सरकार के काम करने के तरीके…

योगी जी ने केवल 19 फर्जी मदरसों की फंडिंग रोकी…..
लगभग 5000 मदरसे रातों रात खुद से लापता हो गए…
इसे कहते हैं-“कानून का शासन”

भारत की जनता को उस और सोचना ही होगा जहा पर उनके भारत का कोई बटबारा ना कर सके क्यूकि भारत के पिछले कई शताब्दियो से इतने टुकडे किये गये हैं कि अब हर सम्प्रदाय सोचता है कि भारत को जब चाहो तोड़ा जा सकता है क्युकि भारत के हिन्दू धर्म से ही अब तक करीब-करीब 12 धर्मो का निर्माण हो चुका है,बाकी जो भी समाज धर्म रह गया है उसे या तो ईसाई खाने की फ़िराख मे है या इस्लाम… अब देखना ये है कि भारत अपनी लडाई लड़ पाता है या फ़िर 711 ई. फ़िर से अपने दौर को दौहरायेगी…

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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