कैसे बचेगी जान, रूठे धरती के भगवान जरूरी सेवाएं देने में आनाकानी कर रहे कई निजी डॉक्टर
अलीगढ़ । संकट की घड़ी में डॉक्टर भी रूठ गए हैं। कई निजी डॉक्टर डायलिसिस, कीमोथेरेपी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन व संस्थागत प्रसव कराने में आनाकानी कर रहे हैं। कुछ तो संक्रमण के डर से अस्पताल व क्लीनिक बंद किए हुए हैं। मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं। शासन ने निजी अस्पतालों में जरूरी सेवाएं शुरू कराने को कहा है। अधिकारी उलझन में हैं कि मानक के अनुसार निजी अस्पतालों को कैसे शुरू कराएं?
नियमों में उलझे डॉक्टर
कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए शासन ने निजी अस्पतालों में ओपीडी व इमरजेंसी सेवाएं देने के लिए गाइडलाइन जारी की है। इसमें डॉक्टरों को अस्पताल या क्लीनिक में शारीरिक दूरी का पालन कराने, हर छह घंटे में सैनिटाइजेशन, डॉक्टर व स्टाफ के लिए पीपीई किट, मास्क, ग्लब्स आदि व सर्दी-खांसी के मरीजों का डाटा सीएमओ कार्यालय भेजने की अनिवार्यता है। तमाम डॉक्टर इन नियमों को व्यावहारिक नहीं मान रहे और अपने क्लीनिक, अस्पताल शुरू नहीं कर रहे।
कोरोना की जांच पर जोर
शासन के सचिव वी.हेकाली झिमोमी ने महानिदेशक (चिकित्सा व स्वास्थ्य) को भेजे पत्र में कहा है कि कोरोना के डर से निजी डॉक्टर महत्वपूर्ण सेवाएं देने में आनाकानी कर रहे हैं या संस्थान ही बंद कर दिए हैं या सेवा उपलब्ध कराने से पूर्व कोविड-19 के परीक्षण पर जोर दे रहे हैं। निजी अस्पतालों व क्लीनिक में आकस्मिक व सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं को चालू कराया जाए।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. संगीता सिन्हा का कहना है सरकारी मानक जटिल हैं, जिनका अनुपालन संभव नहीं है। कोई संक्रमित मरीज आ गया तो समस्या हो जाएगी। मैंने ओपीडी बंद कर दी है। कीमोथेरेपी व अन्य सेवा के लिए कुछ मरीजों को अन्यत्र रेफर कर दिया है।
आइएमए के प्रदेश सचिव डॉ. जयंत शर्मा का कहना है कि डायलिसिस के मरीजों में लक्षणों के आधार पर पता नहीं लगा सकते कि उसे कोरोना वायरस का संक्रमण है या नहीं। डॉक्टर भी इंसान हैं। एहतियातन ही काफी डॉक्टर इलाज से बच रहे हैं। इलाज से पहले कोविड-19 जांच की बात ठीक नहीं है।
एसीएमओ डॉ. पीके शर्मा का कहना है कि काफी डॉक्टरों ने इलाज शुरू नहीं किया है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। शासन के आदेश हैं कि निजी अस्पतालों-क्लीनिक में आवश्यक सेवाएं शुरू की जाएं। आइएमए व पीडीए पदाधिकारियों से वार्ता कर समाधान निकाला जाएगा।