प्रत्येक अधिकारी आपकी तरह नही होते साहब कुछ छुटभैये तथाकथित राजनीति दलों के दलालों के तलवे चाटने में माहिर होते हैं…..आरती*
यहां तो मासूम बच्चों भरी महामारी में भूखे मारा जाता है माता पिता को झूठे केस में फंसाकर उनको मां बाप से खतरनाक कोरोना महामारी के मध्य जेल भेजा जाता है महीनों इनके द्वारा(रायगढ़ पुलिस जिला प्रशासन) द्वारा महामारी काल मे झूठी मिडियाबाजी कर बच्चो के माता पिता को बदनाम कर उन्हें मानसिक प्रताड़ना दिया जाता है…छोटे छोटे बच्चों को माता पिता से दूर कर उनकी खुशियां सिर्फ इसलिए छीनी जाती है कि वो जिस राजनीतिक दल से प्रभावित है उनके दलालों को खुश कर सके और ईमानदार पत्रकार परिवार को आहत कर सके।हर जिले के अधिकारी आपकी तरह संवेफनशील नही कुछ अधिकारी दलालोँ माफियाओं को संरक्षण देने वाले उनके गुलाम भी होतें हैं।कितना दुखद है भगवान न करें यही घटना इनके बच्चो के साथ होगी तो इन्हें कैसा लगेगा?भगवान के घर देर है अंधेर नही है। – ✍️आरती वैष्णव
बिलासपुर के कलेक्टर डॉ संजय अलंग जब केंद्रीय जेल में निरीक्षण के लिए पहुँचे तो देखा कि एक 6 साल की बच्ची अपने पिता से लिपट कर रो रही थी। पूछने पर पता चला कि एक अपराध में सजायाफता क़ैदी है, ये उसकी बेटी है। 5 साल की सजा काट ली है, 5 साल और जेल में रहना है। ये बच्ची जब 15 दिन की थी, तभी उसकी माँ की मृत्यु हो गई थी। पालन पोषण के लिए घर में कोई नहीं था। इस लिए उसे जेल में ही पिता के पास रहना पड़ रहा है।
कलेक्टर साहब उसे अपनी कार में बैठाकर जेल से स्कूल तत8क खुद छोड़ने गए। शहर के जैन इंटरनेशनल स्कूल ने इसे एडमिशन दिया। वह स्कूल के हॉस्टल में ही रहेगी। इसके लिए विशेष केयरटेकर का भी इंतज़ाम किया गया है। सारा खर्चा खुद कलेक्टर साहब उठाएँगे।
कलेक्टर साहब को वंदन ऐसे लोगों के साथ ही मानवता जीवित है।।