महाशिवरात्रि के दीन शिव मन्दिर पर लगी रही श्रद्वालुओं की भीड़
कुशीनगर तमकुहीराज/स्थानीय मन्दिर में महाशिवरात्रि को पूरी विधि विधान से पूजा की गई मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन शिवरात्रि के उपलक्ष्य में उजारनाथ स्थिति मन्दिर में मेला लगाया जाता है जोकि इस साल 11 मार्च को लगा था आज के दिन दूर दूर से लोग मेले में आते है और मेले का लुफ्त उठाते है खास तौर से खलवापट्टी सपही बुजुर्ग अमरवा लोहलनगड़ी गगलवा देवरिया वृत करमैनी भेलया मठिया मोगलपुरा जवार फतमपट्टी सिंदूरिया बुजुर्ग आदि गांव की महिलाओं को शिवरात्रि के दिन का इंतजार रहता है जो साल में एक वार एक दिन लगता है इस दिन को बूढ़े जवान महिलाएं सभी लोग महादेव की पुष्प रोली,मोली ,चावल,पान, सुपारी,लौंग,इलाइची, धतूरा,बेलपत्र दूध घी आदि लेकर पूजा अर्चना कर मेले का इन्ज्वाय लेते है । मान्यता है कि सृष्टि के प्रारम्भ में इसी दिन मध्य रात्रि भगवान शंकर का ब्रह्म से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। भगवान शिव और उनका नाम समस्त मंगलों का मूल है। वे कल्याण की जन्मभूमि तथा परम कल्याणमय हैं। समस्त विद्याओं के मूल स्थान भी भगवान शिव ही हैं। ज्ञान, बल, इच्छा और क्रिया शक्ति में भगवान शिव के जैसा कोई नहीं है। वे सभी के मूल कारण, रक्षक, पालक तथा नियन्ता होने के कारण महेश्वर कहे जाते हैं। उनका आदि और अंत न होने से वे अनंत हैं। वे शीघ्र प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सम्पूर्ण दोषों को क्षमा कर देते हैं तथा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, ज्ञान, विज्ञान के साथ अपने आपको भी दे देते हैं। देवों के देव महादेव को इसी लिए यहाँ की महिलाओं सहित बूढ़े बच्चे सभी लोग जलाभिषेक करते है और मेले का मजा उठाते है ।