महिला स्वास्थ्य की उपेक्षा क्यों ?

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर — ( चिंतन )

   महिला स्वास्थ्य की उपेक्षा क्यों ?

भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है , यही  कारण है कि उन्हें अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है । वर्तमान में महिलाएं कुपोषण,  असुरक्षित प्रसव , रक्ताल्पता, चिकित्सा का अभाव ,शिशु मृत्यु  , पेट दर्द – पीठ दर्द अनियमित मासिकधर्म,  बुखार आदि समस्याओं से ग्रस्त रहती हैं । जहां संविधान द्वारा महिलाओं को अधिकार संपन्न बना दिया गया हो परंतु व्यावहारिक जीवन में  वे सभी अधिकारों से वंचित हों । जहां सबको स्वास्थ्य  का नारा दिया जाता हो परंतु स्वास्थ्य सुविधाओं के ही अभाव में अकाल मौत हो रही हों । जहां बीते 10 वर्षों में बालक – बालिका शिशु मृत्यु दर में 100 और 143 हो , वहाँ महिला दिवस की शुभकामनाओं का कोई औचित्य नहीं ।
भारत की बहुत सी  महिलाएं यौन संक्रमित रोगों से पीड़ित हैं । ये रोग बंध्याकरण का मुख्य कारण है ।  बीमार गर्भवती स्त्री का शिशु – नेत्रहीन , मानसिक असंतुलन तथा कुपोषण का शिकार हो सकता है। भारत में महानगरों में गंदी बस्तियों में रहने वाली  अनेक महिलाएं , मजबूरी के  कारण , वेश्यावृत्ति करने को विवश हैं । ऐसी महिलाओं में एच. आई.वी.( H.I.V) से पीड़ित महिला का गर्भस्थ  शिशु भी एड्स के विषाणु  से प्रभावित हो जाता है ।  महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में मातृ -मृत्यु दर रोंगटे  खड़े कर देने वाली एक त्रासदी  है ।
अधिकांश महिलाएं रक्ताल्पता (एनीमिया) से पीड़ित होती  है । महिलाओं में खून की कमी की सबसे अधिक घटनाएं पोषण के मामले में महिलाओं के साथ होने  वाले भेदभाव के कारण होती है । भ्रूण -क्षय  से और नवजात शिशु की मृत्यु की स्थिति में महिलाओं के गर्भ धारण करने की आवृत्ति बढ़ जाती है । और अंततः वह रक्ताल्पता (एनीमिया) से  पीड़ित हो जाती ।

मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में कई प्रकार के हार्मोनल बदलाव आते हैं जिसके कारण उन्हें कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। मेनोपॉज होने का सही समय 40 या उसके बाद होता है और यदि इस उम्र के पहले महिलाओं को मेनोपॉज आ जाता है तो उन्हें असहजता महसूस होने लगती है। मेनोपॉज के दौरान अंडे का उत्पादन होना बंद हो जाता है और इस वजह से भी कई मानसिक और शारीरिक समस्या हो जाती है। मेनोपॉज के बाद कई महिलाओं का वजन अनियमित रूप से बढ़ने लगता है और इसके कारण भी उन्हें कई स्वास्थ्य समस्या होने का खतरा बढ़ जाता है।
अंतराष्ट्रीय महिला दिवस का अभिप्राय चंद गिनी चुनी महिलाओं को सम्मानित करना ही नहीं है , वरन  उपेक्षित महिलाओं के स्वास्थ्य की चिंता और निराकरण करना भी है ।
  डॉ . निरूपमा वर्मा
एटा -उत्तर प्रदेश

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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