मुकेश अम्बानी की रिलायंस को सभी 22 सर्किल का स्पेक्ट्रम मिल गया है। अब हर चैनल -अख़बार बताएगा की रिलायंस ने ऊँची बोली लगाई मतलब प्रक्रिया सही है

कानूनीघोटाला

मुकेश अम्बानी की रिलायंस को सभी 22 सर्किल का स्पेक्ट्रम मिल गया है। अब हर चैनल -अख़बार बताएगा की रिलायंस ने ऊँची बोली लगाई मतलब प्रक्रिया सही है।

असलीखेल समझो। सबसे पहली बात, इस स्पेक्ट्रम में बोली लगाने वाले BSNL को सरकार ने कभी 4G

स्पेक्ट्रम ही नहीं लेने दिया तो वो कैसे बोली लगाता। मतलब रेस में दौड़ने वाले सबसे मजबूत घोड़े की टांग पहले ही तोड़ दी ताकि हारने का सवाल ही ना बचें।

एयरटेल, वोडाफोन को पैसा चुकाने के लिए सुप्रीम कोर्ट समय नहीं दे रहा है इस लिए वो दौड़ में आएंगे कैसे(लेकिन यहाँ रिलायंस को 18 साल दिए जा रहे)

रेलवे का सारा कॉन्ट्रेक्ट एयरटेल के पास था जिसे छीन कर मोदी सरकार ने रिलायंस को दे दिया, सरकारी ऑफिसों को जोड़ने का काम भी BSNL और एयरटेल से छीन के रिलायंस को दे दिया गया।

कश्मीर में रिलायंस जिओ बिना वेरिफिकेशन के अपने प्रीपेड कस्टमर्स को पोस्ट पेड बता के चलाता रहा लेकिन एयरटेल और बाकी कंपनियों के लिए वेरिफिकेशन इतना टेढ़ा कर दिया की उनका यूजर बेस ही चला गया। जब कोई मार्किट में बचा ही नहीं तो बोली लगाएगा कौन। और जब रिलायंस ही बोली लगाएगा और वो ऊँची ही होंगी।
रिलायंस एक तरह से अकेला दौड़ा और जीत गया।

कानूनीझोल

रिलायंस ने 20 साल के लिए 57123 करोड़ में नया स्पेक्ट्रम ख़रीदा है लेकिन इसका पेमेंट फिलहाल सिर्फ 19,939 करोड़ ही करेगा। इसके बाद उसे बचा हुआ 37,184 करोड़ रुपया देने के लिए सरकार ने 18 साल का समय दिया है। सरकार ने 2 साल का मोरिटोरियम भी दिया है जिसमें कोई पेमेंट नहीं देनी है उसके बाद धीरे -2 इसी स्पेक्ट्रम का यूज करके पैसे कमाओ और उसी से पैसा भर दो। इस पैसे पर ब्याज की दरें 7.3% हैँ जबकि इसी देश में शिक्षा ऋण पर ब्याज दर 10.65% है।

आज के समय में जेपी, आम्रपाली जैसे सैकड़ों बिल्डर प्रोजेक्ट पूरे नहीं कर पा रहे हैँ, जिनमें लाखों लोगों का पैसा फंसा है, उनको लोन 18% से 24% के रेट पे मिलता है लेकिन इस पैसे पर रिलायंस को मात्र 7.3% सालाना ब्याज देना होगा।

देश में कोयला आवंटन और 2G स्पेक्ट्रम आवंटन को घोटाला बताने वाली कैग संस्था बची हो तो उन्हें नींद से जगाइए और पूछिए की ये प्रक्रिया किस तरह से सही है?

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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