
जाट बाहुल्य इलाकों में खतरे में बीजेपी! शुरू हुआ ‘मिशन डैमेज कंट्रोल’
वैसे तो अब तक बीजेपी के नेता लगातार यही कहते या दावा करते आ रहे थे कि सारे विरोध का केंद्र पंजाब ही है औऱ बाकी अन्य राज्यों में कोई विरोध नहीं है. लेकिन अब मामला गड़बड़ होता नजर आ रहा है.
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में दो-तीन मुद्दों पर चर्चा हुई, समीक्षा भी हुई औऱ अंत में कुछ फैसले भी लिए गए. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चर्चा के दौरान बार-बार एक मुद्दे की समीक्षा हुई कि इस किसान आंदोलन का आने वाले दिनों में कितना राजनीतिक हानि-लाभ संभव है या उसकी आशंका है. पार्टी नेता अब भी खुलकर यही कह रहे हैं कि किसानों को राजनीतिक तौर पर गुमराह किया गया है. सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी मंथन के बाद जो कुछ तय किया गया है उसके मुताबिक, नेताओं को पंचायत स्तर पर जाकर छोटे-छोटे समूहों में किसानों की गलतफहमियों को दूर करने को कहा गया है. पार्टी के नेताओं के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में पार्टी के किसान नेता, जिनमें जाट भी हैं, उन्हें गांवों, पंचायतों में जाकर बैठक करने को कहा गया है. साथ ही, कृषि कानून किस कदर उनके लिए लाभप्रद है और कुछ राज्यों में किसान किस तरह से इसका लाभ उठा रहे हैं, उसे भी बताने को कहा गया है.
पार्टी की मौजूदा चिंता की एक वजह यह भी है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव लंबित हैं और दोनों स्थानों पर इन चुनावों को लेकर माहौल बनना भी शुरू हो गया है. हरियाणा में फरवरी में ही पंचायत चुनाव होने थे, जबकि उत्तर प्रदेश में अप्रैल में चुनाव लंबित है, लेकिन मौजूदा परिस्थिति में हरियाणा में जींद-कैथल में किसान आंदोलन के दौरान जिस तरह मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कार्यक्रमों में अवरोध पैदा करने की कोशिश की गई, उसे लेकर पार्टी मंथन में जुटी हुई है. हरियाणा में लगभग 36-37 विधानसभा क्षेत्रों में जाट वोटरों का दबदबा है, इनमें सिरसा, झज्जर, सोनीपत, रोहतक, हिसार प्रमुख हैं. 2019 विधानसभा चुनावों में भी जाट बाहुल्य इलाकों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई थी.