शासन को देर ही सही लेकिन एटा की सुध आ ही ग़ई….

शासन को देर ही सही लेकिन एटा की सुध आ ही ग़ई….

एटा को एक एतिहासिक गर्त मे ले जाने का अगर कभी इतिहास लिखा जायेगा तो जिलाधिकारी सुखलाल भारती के नाम को बेहद निराशा मय शब्दो के साथ लिखा जायेगा!

सुखलाल भारती बेसे तो एक प्रोमिट IAS है लेकिन जिस तरह की शैली देखने को मिली, शायद ही एटा के इतिहास मे रही होगी, जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने जिस तरह से एटा को रिश्वत का एक अड्डा बना दिया था मुमकिन है कि नवागत जिलाधिकारी बिभा चहल उस दाग को मिटाने का प्रयास कर सके,

????( आज ही वेक्सिनेसन हुआ था जिलाधिकारी सुखलाल भारती का और पुरा कोरोना ही जिले से चला गया….)????

रिश्वत के सुख………

जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने रिश्वत की गंगा को जिस रास्ते से बहाया है उन तरीको के विषय पर आज तक किसी अञ जिलाधिकारी ने सोच ही नहीं पाया था, लाइसेंस से लेकर बैनामा परमिशन तक के मामलो मे जम कर लुट की गई है,

लेखपाल हैसियत की पोस्टिन्ग थी ..

सुखलाल भारती पर हम पहले भी उनके कार्य प्रणाली पर लेख लिख कर जानकारी दे चुके थे कि सुख लाल भारती ने सिर्फ़ IAS का सुख भोगने के सिबा कुछ भी जनपद मे विशेष कार्य नहीं किया था,

वामसेफ़ का एजेन्डा चलाने मे माहिर खिलाडी है….
सुखलाल भारती के जिलाधिकारी बनने के कुछ दिन बाद ही जिले मे वामसेफ़ के एजेन्डे को घुमाने लगे थे, जिसे कई बार देखा और बुद्धजीबियो द्वारा आपस मे साझा भी किया गया था…

BJP के विधायक हो या संसद सदस्य..

इस मामले मे जिलाधिकारी सुखलाल भारती ने जिले के सभी आला विधायक व सांसद को भी जमकर घुमाया था,क्युकि DM सुखलाल भारती यह बखुबी जानते थे कि BJP के नेताओ से लेकर सन्घ के पदाधिकारीयो को किस लोलीपोप की आवश्यकता थी,इसी योग्यता ने सुखलाल भारती को अब के सबसे बड़े कार्यकाल तक जिले की कमान पर बनाये रखा,

अभी हाल के खेल मे भी विधायको व सांसद मे मतभेद कराने मे भी सुखलाल भारती के दिमाग का ही खेल था,असलाह लाइसेन्स बनाने व रोकने मे जिला कलेक्टर ने सदर विधायक विपिन कुमार वर्मा के सर मड दिया था,यही से सदर विधायक के दिमाग मे सुखलाल भारती खटकने लगे,

अभी एक अधिकारी के जाने का इन्तज़ार एटा की जनता को और है….

सुखलाल भारती के चरित्र को खराब करने मे जिले के अपर जिलाधिकारी के पद पर आसीन केशब कुमार का बहुत बड़ा हाथ माना जा रहा है क्युकि असलाह बाबू से रिश्वत से लेकर बैनामा परमीसन तक खेल मे माहिर इस अधिकारी को पुर्व जिलाधिकारी आई पी पान्डे ने तक दुर रखा था,

एटा की सरजमीन को गन्दगी से बचाया जा सकता है

असलाह बनने पर लगे बिराम से तिलमिलाये अपर जिलाधिकारी केशव कुमार को अब यह नही सुझ रहा है कि अब क्या नवागत जिलाधिकारी बिभा चहल को भी इसी गर्त मे लाया जा सकता है,

अपर जिलाधिकारी विवेक कुमार मिश्र के कार्यकाल को देखा जाये तो बड़े ही सजीदे तरीके से आगे बढ़ाया है जहा किसी तरह के दाग नजर नही आते है,

याद किये जायेगे….

जिले मे तत्कालीन अधिकारी याद किये जायेगे जिसमे श्री विजय किरण आनद ,श्री महेन्द्र सिंह तवर,श्री अमित किशोर,श्री आई पी पान्डे ,इस समय यह सभी अधिकारी जहा भी है अपनी कार्यशैली से पहचान लिये है

CONFERENCE की पडताल जारी रहेगी…..

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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