बसें कंडम, ड्राइवर कम, रोडवेज के 64* *रूट हुए बंद

*. बसें कंडम, ड्राइवर कम, रोडवेज के 64* *रूट हुए बंद।* ???????????????????????????????????????? *फ़िरोज़पुर/* वर्ष 1971 में 400 बसों के साथ शुरू हुए पंजाब रोडवेज के फिरोजपुर डिपो में अब महज 59 बसें बची हैं, जिनमें से भी कई बसें कंडम हो चुकी हैं, जिस कारण जहां कई रूट प्रभावित हो रहे हैं वहीं कई रूट बंद भी कर दिए गए हैं। सरकार की लापरवाही के चलते प्राइवेट बस आपरेटरों का बिजनेस खूब चमक रहा है। *फिरोजपुर डिपो* से किसी समय *राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, उतराखंड, हरियाणा व हिमाचल* के लंबे रूट पर बस सर्विस शुरू की गई थी जो बसों की कमी कारण बंद हो गई। अब इन रूट्स पर *प्राइवेट* बसें चलती हैं। *फिरोजपुर डिपो के पास 161 रूट हैं जिनमें से 97 रूट ही चलते हैं। इसके अलावा डिपो की 26 बसें पहले ही कंडम हो चुकी हैं और 28 बसें कंडम* होने की कगार पर है। अगर ये बसें बंद की जाती है तो 20 रूट और बंद हो जाएंगे। *फिरोजपुर डिपो* के पास सब डिपो *फाजिल्का में 24* बसें और *ज़ीरा में 14* बसें है। *फिरोजपुर डिपो में 59* बसें है। रोडवेज डिपो के प्रधान रेशम सिंह ने बताया कि सरकारी बसें बहुत कम है और कुछ बसें किलोमीटर के हिसाब से चलती हैं। *सरकार की ओर से 85 ड्राइवर होने चाहिए, लेकिन विभाग के पास 74 ड्राइवर है।* बाकी किलोमीटर स्कीम वाले ठेकेदारों के अंडर काम करते है। उन्होंने कहा कि सरकार ने नई बसें और ड्राइवर न दिए तो डीपों बंद होने की कगार पर आ जाएगा। उन्होंने कहा हांलाकि प्राइवेट कंपनियां सरकारी बसों का रूट बंद होने का फायदा उठा रही है। यहां तक कि सरकारी बसों की इंश्योरेंस नहीं की गई। दुर्घटना होने पर ड्राइवर अपनी जेब से 50 हजार देना पड़ता है। सरकार के ध्यान में लाया गया है मामला : *सुभाष कुमार* *रोडवेज डिपो के जनरल मैनेजर सुभाष कुमार ने बताया* कि रोडवेज की काफी बसें कंडम हो चुकी हैं और बसों की काफी कमी चल रही है, जिस कारण रूट मिस हो रहे हैं । *26 बसें अभी भी कंडम पड़ी है, आने वाले दो तीन महीनों में 15 से 20 बसें ओर कंडम हो जाएगी, क्योंकि हर बस की लाइफ 15 साल होती है,* कुछ ठीक बसों को रिपेयर कर तीन-चार साल और चला भी देते है। सरकार के ध्यान में इस संबंध में लाया जा चुका है। *यात्री हो रहे परेशान* *बस स्टेंड* पर बस का *इंतजार* कर रहे *धीरज कुमार, राज कुमार, जगदीश सिंह, किट्टी सहोता, आशु, नवदीप कौर* ने बताया कि कई बार इस स्टैंड पर घंटों खड़े रहते है, तब पता चलता है कि बस नहीं जाएगी, क्योंकि टाइम मिस है। लुधियाना व चंडीगढ़ के रूट रद होने से ड्यूटी और कोर्ट के मसलों में परेशानी होती है। जिन छात्रों के पास बने होते है उनको प्राइवेट बसों में पैसे खर्च करने पड़ते हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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