उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद है कि वो रिस्वत खोरी को अपना जन्म सिद्ध अधिकार मान बैठे है

जबरन उगाही का आतंक राज

उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद है कि वो रिस्वत खोरी को अपना जन्म सिद्ध अधिकार मान बैठे है।

कर्मचारी खुले आम रिश्वत मांगते है उन्हें सरकार का ख़ौफ विल्कुल नही है ,हो भी क्यों ? रिश्वत का हिस्सा उच्चाधिकारियों तक जो जाता है ।

उच्चाधिकारी आखिर अपने कर्मचारियों को नैतिकता का पाठ क्यों नहीं पढ़ा पा रहे?

बढ़ा सवाल ये है क्या ये उच्च अधिकारी भी अपनी उपरी इनकम का कुछ हिस्सा कहीं और चढ़ाते है ?

आखिर क्यों अधिकारियों और कर्मचारियों में सरकार का कोई खौफ नहीं है?

आखिर क्यों जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि उच्च अधिकारी और कर्मचारियों पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं?

क्या योगी सरकार ने जनप्रतिनिधियों के अधिकार क्षेत्र सीमित कर दिए हैं, या ये भी इस बंदरबांट का हिस्सा है?

इन यक्ष प्रश्नों का जवाब मिलना थोड़ा मुश्किल लगता है।

पर जब तब रिश्वतखोरी या जबरन वसूली की कोई खबर चलती है या कोई वीडियो वायरल होता है तो जनता अपने आप को ठगा सा महसूस करती है।

क्या अधिकारियों कर्मचारियों के ऐसे कृत्य देखने के लिए जनता ने सरकार को चुना था?

पिछले 2 दिनों से एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें फिरोजाबाद जनपद का एक राज्य कर्मचारी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री को अपशब्द बोल रहा है।

{ वीडियो में अत्यधिक अश्लील भाषा है इस कारण से वीडियो पोस्ट नही कर रहे है सिर्फ अश्लीलता कर रहे व्यक्ति का फोटो पोस्ट किया जा रहा है }

ऐसे वीडियो को देखकर लगता है उत्तर प्रदेश सरकार ने अपराधों पर तो नियंत्रण किया है लेकिन भ्रष्टाचार में उत्तर प्रदेश अभी एक नंबर पर है।

सुशासन के नाम पर उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग, तहसील, राजस्व विभाग,शिक्षा विभाग ,सब मे भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है।

आम जनमानस बिना रिश्वत के अपना काम नहीं करा सकती और जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं अधिकारियों पर हमारा बस नही ।

यदि वास्तविकता यही है कि जनप्रतिनिधियों का कर्मचारियों और अधिकारियों पर कोई बस नहीं है तो क्यों नहीं उन्होंने सदन में कोई प्रश्न उठाया?

भ्रष्टाचार पर आखरी ये दोहरा रवैया क्यों???

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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