ट्रैक्टर रैली हिंसा में 8 बसें और 17 वाहन, 4 कंटेनर तोड़े गए, कई पुलिसकर्मी घायल, FIR दर्ज

हथियार लेकर नहीं चलना, निर्धारित मार्ग का पालन करना और ट्रॉलियों के बिना ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली में प्रवेश करना… ये कुछ शर्तें थीं जिस पर सहमति किसान नेताओं और पुलिस के बीच बनी थी किंतु कल ट्रैक्टर परेड में शामिल कई प्रदर्शनकारियों द्वारा इनका उल्लंघन किया गया. कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के मार्च में इस शर्त का भी उल्लंघन किया गया कि 1 ट्रैक्टर पर 5 से अधिक व्यक्ति सवार नहीं होंगे. यह ट्रैक्टर मार्च हिंसक हो गया और इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई स्थानों पर झड़प हुई.
किसानों ने बेरिकेड हटा दिये और आगे बढ़े और उन्हें रोकने की कोशिश करने वाले पुलिस कर्मियों से भिड़ गए. कई स्थानों पर उन्हें लाठी, तलवार और अन्य तेज धार वाले हथियार लिए और पुलिसकर्मियों का पीछा करते हुए देखा गया. गाजीपुर बार्डर से आईटीओ की ओर निकलने और किसान लालकिला पहुंच गए. इन किसानों को पुलिस के साथ भिड़ते और पुलिसकर्मियों को लाठियों से मारते देखा गया. अक्षरधाम के पास कुछ प्रदर्शनकारियों को तलवारें लिये और पुलिसकर्मियों का पीछा करते देखा गया.
इस हिंसा को लेकर ईस्टर्न रेंज में पुलिस ने अब तक 7 मुकदमे दर्ज किए हैं. इसमें एक मामला पांडव नगर थाने में, 2 गाजीपुर थाने में और एक सीमापुरी थाने में दर्ज किया गया है. पुलिस के मुताबिक उपद्रवियों ने 8 DTC बस, 17 पब्लिक व्हिकल, 4 कंटेनर, 300 से ज्यादा लोहे के बेरीकेड्स तोड़े हैं. उपद्रवी पुलिसकर्मियों पर लाठीचार्ज करते दिखे. प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा में 86 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं.
किसान यूनियनों के नेताओं ने रविवार को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के लिए शर्तों को रेखांकित किया था. उन्होंने गणतंत्र दिवस के दिन निकाले जाने वाली ट्रैक्टर परेड में शामिल लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करने के साथ ही उनसे हथियार न रखने, शराब नहीं पीने, भड़काऊ संदेश वाले बैनर नहीं रखने का कहा था. प्रदर्शनकारियों को विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी के सिंघू, टिकरी और गाजीपुर सीमा बिंदुओं से निकलने वाले तीन मार्गों का पालन करने के लिए कहा गया था जो क़ि नही हुआ.