भ्रष्टाचार अनियमितता और कमीशन खोरी का पर्याय बनी नगर पालिका परिषद एटा

झूठों का बोलबाला! सच्चों का मुंह काला?

भ्रष्टाचार अनियमितता और कमीशन खोरी का पर्याय बनी नगर पालिका परिषद एटा

  • अवैध तरीके से अनुपम कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स की दुकानों को किराये पर उठाकर किया है दण्डनीय अपराध!
  • पालिकाध्यक्ष ने अपने कृपा पात्र अयोग्य कर्मचारियों को बैठा रखा है जिम्मेदार पदों पर!
  • नई बस्ती निवासी ठेकेदार राकेश यादव ने की मुख्यमंत्री से शिकायत
  • पालिका प्रशासन पर चल सकता है सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ का चाबुक?
  • ट्रांसपोर्ट नगर में भूखण्डों को कर दिया है अपात्रों को आवंटित! इसलिए नहीं बस पा रहा है ट्रांसपोर्ट नगर ?
  • अनुपम कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स में आखिर किसके आदेश से खोला गया है विमला लॉज ?
    ,एटा। नगर पालिका परिषद एटा भ्रष्टाचार अनियमितता एवं कमीशन खोरी का पर्याय बनी हुई है। निर्माण कार्यों विकास कार्यों में ठेकेदारों से लिए जाने वाले मोटे कमीशन के चक्कर में कार्यों में गुणवत्ता का अभाव कभी भी देखा जा सकता है। कुछ ही दिन पूर्व की बात है जब इस कमीशन खोरी की आवाज एक सभासद ने उठाई तो उसे हवालात की हवा खाने तक का खामियाजा उठाना पड़ा था। पालिकाध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी शासन प्रशासन को धता बताते हुए अपनी उदर पूर्ति में लगे हुये हैं। नगर पालिका परिषद एटा प्रशासन पर ऐसे ही कुछ अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए एक शिकायत मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से की गई है। जिससे उम्मीद की जा रही है कि निकट भविष्य में नगर पालिका परिषद एटा के भ्रष्ट प्रशासन और पालिकाध्यक्ष पर योगी आदित्यनाथ का चाबुक चल सकता है। मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से यह शिकायत बीती 16 जनवरी को नई बस्ती निवासी ठेकेदार राकेश यादव की ओर से की गई है। जिसमें शिकायत कर्ता ने सर्व प्रथम अनुपम कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स का मुद्दा उठाया है। जिसमेें आरोप लगाया गया है कि इस कॉम्पलैक्स का निर्माण करने वाली कंपनी ने अभी तक इसे पालिका प्रशासन के सुपर्द नहीं किया है साथ ही कॉम्पलैक्स से संबंधित मामला न्यायालय में भी विचाराधीन है। फिर भी पालिका प्रशासन सभी नियम कानून ताक पर रखकर माननीय न्यायालय की अवहेलना करते हुए अनुपम कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स में बनी दुकानों को विमला लॉज समेत अन्य प्रतिष्ठानों को मोटा एडवांस लेकर किराये पर दे रखा है। जिसका सत्यापन कभी भी कोई भी सक्षम अधिकारी मौके पर जाकर कर सकता है। मजे की बात तो यह है कि पालिका का यह कृत्य न तो जिलास्तरीय अधिकारियों को दिख रहा है और ना ही विधायक सांसद आदि जन प्रतिनिधियों को।
    इसके अलावा शिकायती पत्र में कहा गया है कि नगर पालिका परिषद एटा के अधीन ट्रांसपोर्ट नगर में स्थित भूखण्डों का आवंटन अपात्र व्यक्तियों को कर दिया है। जिससे ट्रांसपोर्ट नगर को आवाद करने की सरकार की मंशा पूरी नहीं हो पा रही है। शिकायत कर्ता का कहना है कि एक एक भूखण्ड तीन तीन लोगों को देकर अवैध रूप से धन तो कमाया ही गया है साथ ही शहर के आवंटियों को गुमराह भी किया गया है। शिकायत कर्ता राकेश यादव का कहना है कि पालिकाध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी ने अपनी खाऊ कमाऊ नीति को जारी रखने के उद्देश्य से मुख्य लेखाकार के पद पर एक ऐसे व्यक्ति को बैठा रखा है जिसे एकाउंटेंसी की एबीसीडी भी नहीं आती। इस व्यक्ति ने ना तो कोई आशुलिप, टंकण का कोर्स किया है और ना ही लेखा संबंधित कोई शिक्षा ही ग्रहण की है।उक्त बहोरी लाल ने कुछ ही वर्षों में अपनी आय से कई गुना चल व अचल सम्पत्ति अर्जित कर ली है। शिकायत कर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में लेखाकार के पद पर तैनात बहोरी लाल ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी प्राप्त की है अतैव लेखाकार बहोरीलाल के शैक्षिक प्रमाणपत्रों की जांच होना जनहित में अति आवश्यक है।
    शिकायत कर्ता राकेश यादव ने रेन्ट लिपिक यशवीर यादव पर भी ऐसे ही गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र में लिखा है कि यशवीर यादव ने भी फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नगर पालिका परिषद एटा में सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली थी। इस वजह से तत्कालीन पालिकाध्यक्ष कंचन गुप्ता (अडं़गा) ने उक्त यशवीर सिंह यादव को बर्खास्त भी कर दिया था। परन्तु निर्वतमान पालिकाध्यक्ष राकेश गांधी जैसे ही पदासीन हुए तो उन्होंने सभी नियम कानूनों को धता बताते हुए यशवीर सिंह यादव को सिर्फ बहाल हीं नहीं किया बल्कि अवैध तरीके से पूरा वेतन भी निकालवा दिया साथ ही इस भ्रष्ट कर्मचारी की पदोन्नति कर रेन्ट लिपिक भी बना दिया। शिकायत कर्ता ने रेन्ट लिपिक यशवीर सिंह यादव नियुक्ति, बहाली एवं पदोन्नति की निष्पक्ष जांच की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है। इसके अलावा पालिका में चल रही मोटी कमीशन खोरी की शिकायत भी की है। शिकायत कर्ता का कहना है कि जब तक नगर पालिका परिषद एटा में चल रही कमीशन खोरी बंद नहीं होगी तब तक निर्माण कार्यों गुणवत्ता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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