
पंचायत चुनावों की घोषणा से ठीक पूर्व उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन दुआरा प्रधानों के खिलाफ निकाली जा रही सरकारी धन की रिकबरी राजनीति से प्रेरित:-पंकज उपाध्यय एडवोकेट हाई कोर्ट।
एटा,
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों की घोषणा से ठीक पूर्व उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन द्वारा प्रधानों के खिलाफ निकाली जा रही सरकारी धन की रिकवरी राजनीति से प्रेरित है ।यह शब्द पंचायतों पर काम करने वाले हाई कोर्ट इलाहाबाद के वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज उपाध्याय एडवोकेट ने कहे।उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि ग्राम प्रधान के खिलाफ की जा रही सरकारी रिकबरी,संविधान का अपमान है ।क्योंकि प्रधान संवैधानिक निकाय का अध्यक्ष होता है ।पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद पंचायतों के अध्यक्ष अर्थात ग्राम प्रधान के विशेषाधिकार भी होते हैं ।प्रधान के विशेषाधिकार चाहे छोटे हो, लेकिन राष्ट्रीय पंचायत- संसद तथा प्रांतीय पंचायत विधानसभाओं के सदस्य विधायकों के समान ,ग्राम प्रधानों के अधिकार होते हैं ।अतः रिकवरी तथा एफआईआर ग्राम प्रधान के विरुद्ध नहीं होनी चाहिए। क्योंकि ग्राम प्रधान का सचिव सरकार का सीधे प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए यह कार्यवाही शौचालय बनाने वाले विभागों के अधिकारी तथा कर्मचारियों के विरुद्ध होनी चाहिए। क्योंकि यह सरकार के वेतन भोगी जिम्मेदार अधिकारी- कर्मचारी होते हैं। इनके षड्यंत्र के बिना सरकारी धन की चोरी या गवन कैसे हो गया, यह विचारणीय प्रश्न है ।प्रत्येक वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के बाद सरकारी धन के प्रयोग/ दुरुपयोग का प्रतिवर्ष ऑडिट होता है। तो वित्तीय वर्ष 2016- 17 व 2017 -18 के धन के दुरुपयोग की आपराधिक या दीवानी कार्रवाई का वर्ष 2021 में होना व्यवहारिक तथा पूर्वाग्रह से ग्रसित है। ग्राम प्रधानों के खिलाफ इस प्रकार की कार्यवाही, राजनीति से प्रेरित ही कही जाएगी। उत्तर प्रदेश सरकार, उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन को इस पर गहनता से अध्ययन करना चाहिए। और संवैधानिक दर्जा प्राप्त ग्राम प्रधान के खिलाफ रिकबरी निकालकर अपने संवैधानिक पद के खिलाफ दमनकारी नीति ही कही आएगी।इसके लिए सीधे सरकार के वेतनभोगी सरकारी अधिकारी -कर्मचारियों की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
–पंकज उपाध्यय एडवोकेट।
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