डीएम, कप्तान साहब एक नजर इधर भी?
रियल्टी चैक में फेल हुआ प्रशासन।
एटा शहर में 2 मई दिन शनिवार शाम को निकाला गया शहर में फ्लैग मार्च ।
इसे दिखावा माने या कार्यवाही का संकेत।
फ्लैग मार्च प्रारंभ होने के दौरान जिला अधिकारी एटा ने आदेश देते हुए कहा के लॉक डाउन का उल्लंघन कर रहे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा
लेकिन एटा शहर में किसी भी मार्केट में जाकर देखें तो व्यापारी खुलेआम लॉक डाउन की उड़ा रहे धज्जियां
व्यापारी अपने ग्राहक की तलाश में अपनी दुकान के बाहर काटता रहता है चक्कर
दुकानदार के पास जैसे ही कोई खरीदार आता है वो अपनी दुकान का शटर उठाकर ग्राहक को कर देता है दुकान के अंदर बंद।
आप खरीदारी कर लो मैं खड़ा हूं बाहर चौकीदार बन कर
खरीदारी करने के बाद दुकान के अन्दर वाला दुकानदार मोबाइल पर घंटी मार देता है दुकान के बाहर खड़ा व्यक्ति ताले खोल देता है।.
आज मैंने प्रातः बाबूगंज से लेकर सब्जी मंडी होता हुआ मेहता पार्क रोड तक किया था भ्रमण तो दुकानों के बाहर से यह खेल होते देखा।
मैंने बीते दिन जिलाधिकारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की चेतावनीयों को सुनते हुए प्रशासन के सीयूजी.9454401246 नंबर पर दो बार कॉल करके उनकी चेतावनी का रियल्टी चैक की तो वह फेल निकली।
मैंने वहां खड़े होकर बताये गये नम्बर पर फोन किया और आधा घंटे खड़े हो कर इंतजार किया। लेकिन प्रशासन के किसी भी अधिकारी का कोई रियैक्शन नहीं हुआ।
तो वापस आते घंटा घर के बाहर गोदाम चौकी इंचार्ज त्यागी जी को भी मैंने बताया।
बाबूगंज आदि मौहल्लों मैं व्यापारी प्रशासन की मंशा के विपरीत लाॅकडाउन की उड़ा रहे हैं धज्जियां।
आखिरकार पुलिस व जिला प्रशासन इन व्यापारियों को खुलेआम ओवररेटिंग कर दुकानों के बंद के आदेश के बाद भी क्यों करवा रहा है दुकानदारी.।
जबकि प्रशासन ने सभी मार्केट के मुख्य रोड पर पुलिस तैनात कर रखी है क्या वह भी इस खेल में शामिल हैं?
?
शिकायत के बाद भी मौके पर क्यों नहीं पहुंचती है पुलिस।
पत्रकार यदि कलम का सिपाही यदि समाचार लगाता है तो उसके पास तत्काल फोन आ जाता। यदि इतनी सक्रियता प्रशासन अपने काम में दिखाये तो लाॅकडाउन का उल्लंघन करने वालों को रोका जा सकता है
अभी कुछ ही दिन पूर्व में एक पोस्ट डाली गई थी जिसमें लिखा था एक गलत पोस्ट डालने वालों पर होगी एफ आइ आर?
ऐसी ही एक पोस्ट प्रशासन द्वारा डाली जाए कानून का पालन न करवाने वाले के विरुद्ध भी मुकदमा लिख कर कार्रवाई की जाएगी
अगर एटा जनपद में जिला प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी इसी तरह से लापरवाही के चलते कानून का पालन कराते रहे तू जनपद में पूर्णा से होने वाली महामारी को नहीं रोका जा सकता है।
आपको यह भी बताते चलें ठीक जिला प्रशासन द्वारा हेल्पलाइन क्यों निकले जारी किए गए नंबरों पर भी गलती जांच की गई तो वहां पर भी या तो फोन नहीं उठते या जानकारी लोड करने के बाद कार्यवाही नहीं की जाती इसका जिम्मेदार कौन