अत्याधुनिक संसद भवन से भी ज्यादा जरूरी संसद का जनता के प्रति उत्तरदायी होना और लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन करना!

अत्याधुनिक संसद भवन से भी ज्यादा जरूरी संसद का जनता के प्रति उत्तरदायी होना और लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन करना!

करोड़ों रुपए खर्च करके देश को एक नया संसद भवन मिला

वह भवन पहले से अधिक विशाल और अधिक सुविधा संपन्न होगा

लेकिन क्या इससे संसद में होने वाली बहस की गुणवत्ता में कोई सुधार हो पाएगा?

यह एक महत्त्वपूर्ण प्रश्न है जिस पर राजनेतागण विचार नहीं कर रहे हैं!

जिस प्रकार आज राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है

उससे तो यह नहीं लगता कि अधिक सुविधा संपन्न नया भवन बनने से देश की संसद में होने वाली बहस के स्तर में अपेक्षित सुधार हो पाएगा

बड़े और अत्याधुनिक संसद भवन से भी ज्यादा जरूरी संसद का जनता के प्रति उत्तरदायी होना और लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन करना है

जिसका कि आज अभाव देका जा रहा है!

यह नहीं भूलना चाहिए कि सम्मानीय जनों का ही अन्य लोग अनुगमन करते हैं

लेकिन आज जिस प्रकार के उदाहरण हमारे नेता गण आमजन के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं,

क्या वे अनुकरणीय हैं? नया संसद भवन बनाने के साथ-साथ अगर इस प्रश्न पर भी गौर कर लिया जाए तो उचित होगा!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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